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अ की संपत्ति को अवश्य स के लिए धारण करना चाहिए।
यह दायित्व भी इसी हद तक सीमित है - यह केवल संविदा को प्रभावी बनाने
की आवश्यकता की हद तक ही प्रवर्तित किया जाता है।
- संविदा स के लिए संपत्ति का कोई भाग न्यास पर धारण करने के लिए हो सकता
है। उस मामले में दायित्व केवल उस संपत्ति की सीमा तक ही प्रवर्तित किया
जाएगा।
4. किसी व्यक्ति में दो निजी संपत्तियों के विलय से उद्भूत होने वाले
आन्वयिक न्यास
I. धारा - 87
- यह दोहरे व्यक्तित्व की स्थिति के लिए उपबंध करती है - आदमी एक लेकिन
व्यक्ति दो।
प्रत्येक संविदा, ऋण, दायित्व या समनुदेशन दो व्यक्तियों की अपेक्षा करता है।
किंतु ये दो व्यक्ति एक ही मानव हो सकते हैं।
ऐसे सभी मामलों में यदि वह दोहरे व्यक्तित्व की मान्यता के लिए नहीं था, तो
दायित्व या अधिभार विलय के द्वारा नष्ट हो जाएगा।
- क्योंकि कोई व्यक्ति अपने स्वयं के अधिकार से स्वयं किसी बाध्यता के अधीन
नहीं हो सकता है।
किंतु दोहरे व्यक्तित्व की मान्यता से यह संभव है।
वास्तव में यह आवश्यक है।
दृष्टांतः- ऋणी, निष्पाद होकर।
विधि की दृष्टि से निष्पादक स्वामी है।
विलय ऋण की समाप्ति।
- धारा व्यक्त करती है, नहीं।
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