2. डोमिनियन प्रस्थिति पर टिप्पणी - Page 289

272 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

(1) साम्राज्यिक मंत्रिमंडल सलाह से सम्राट द्वारा गवर्नर जनरल की नियुक्ति।

(2) अपने मंत्रियों की सलाह से अन्यथा कार्य करने का गवर्नर जनरल का अधिकार।

(3) साम्राज्यीय शासन की सलाह पर सम्राट की खुशी के लिए विधेयक को सुरक्षित करने की गवर्नर की शक्ति।

(4) साम्राज्यीय शासन की सलाह पर सम्राट द्वारा अस्वीकृति की शक्ति।

वैस्ट मिनिस्टर स्टेटयूट के नियम

I. यह ब्रिटिश संसद द्वारा पारित विधियों के अध्यारोही प्रभाव से डोमिनियन विधान मंडल को मुक्त करता है।

(1) यह औपनिवेशिक विधि वैधता अधिनियम (कालोनियल लॉ वैलिडिटी एक अधिनियम) को निराकृत करता है।

(2) यह डोमिनियन विधानमंडल को किसी भी संयुक्त इंग्लिश राज्य अधिनियम का जहां तक वह अधिराज्य का अंग है, निरसन करना प्रदान करता है।

II. यह ब्रिटिश संसद की विधायी प्रभुसत्ता की सीमाएं निर्धारित करता है।

(1) 11 दिसंबर, 1931 के बाद पारित संसद का कोई भी अधिनियम एक अधिराज्य को विधि के एक अंग के रूप में लागू हुआ नहीं समझा जाएगा जब तक कि अधिनियम में स्पष्टतः न घोषित किया जाता है कि अधिराज्य ने उसके धारण के लिए विनती और स्वीकृति की है।

(2) राज्य सिंहासन के आरोहण, राजसीय पदान्वय एवं उपाधियों को स्पर्श करने की विधि में किसी भी परिवर्तन के लिए अधिराज्य की साथ ही साथ संयुक्त इंग्लिश राज्य के संसदों की अनुमति की अपेक्षा करता है।

III. यह स्टेटयूट अन्य प्रावधानों में परिवर्तन नहीं करताः-

(1) गवर्नर जनरल की नियुक्ति।

(2) विधेयकों का आरक्षण।

(3) विधेयकों की अस्वीकृति।

किंतु इन शक्तियों के प्रयोग में भारी परिवर्तन हुआ है।

सम्राट को सलाह देने का अधिकार है।

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डोमिनियन प्रस्थिति का अभिप्राय प्रभुसत्ता नहीं।

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