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जाती है। इन उपनिवेशों में सात अपवादों के साथ सम्राट ने विधानयन करने की शक्ति संपरिषद् आदेश द्वारा स्वयं में आरक्षित की हुई है।
संरक्षित राज्य यद्यपि महामहिम के अधिराज्यों के अंग नहीं हैं फिर भी अधिकांशतः उसी ढंग से प्रशासित किए जाते हैं जैसे सम्राट उपनिवेश।
अधिराज्य वे उपनिवेश हैं जहाँ निर्वाचित विधायी का जिसके प्रति कार्यपालका का उत्तरदायी है। संयुक्त इंग्लिश राज्य की भांति है। केवल गवर्नर जनरल ही अधिकारी है जिन्हें सम्राट नियुक्त और नियंत्रित करता है।
हाल्सबरी (दशम) पृष्ठ 521
885 संरक्षित राज्य पद की कोई यूनानी या प्रामाणिक परिभाषा नहीं है, यद्यपि हाल ही के दो संविधियों में वह प्रकट होती है, संरक्षित राज्य सुनिश्चित अर्थ में ब्रिटिश राज्य क्षेत्र नहीं है, किंतु यह समझा जाता है कि कोई अन्य सभ्य शक्ति उनके कार्यों में हस्तक्षेप नहीं करेगी। वे फॉरेन जूरिसडिक्शन एक्ट (विदेशी अधिकारिता अधिनियम) 1890 द्वारा महामहिम को प्रदत्त या अन्यथा महामहिम में निहित शक्तियों के आधार पर निर्गत संपरिषद् आदेश के प्रावधानों के अधीन प्रशासित होते हैं। जिस पश्चात् कथित वाक्यांश का आशय राजसी परमादेश के किसी भी प्रयोग व्यवहार को सहायतार्थ, लाना माना जा सकता है जो महामहिम की कानूनी शक्तियों की अनुपूरक स्वरूप आवश्यक हों।
हाल्सबरी (चतुर्दश) पृष्ठ 420
अधिराज्यों के अर्थ की हाल की विवेचना के लिए देखिए आर बनाम क्रीव सम्राट 1910 एस के बी 576, 607, 622
हाल्सबरी (नवम) पृष्ठ 16
सम्राट या प्राधिकार उसकी एकल प्रजा पर जहां कहीं भी वे हो लागू होता है और उन सभी विदेशियों पर भी जो राज्य में है। तो भी आंग्ल विधिक न्यायालयों की अधिकारिता प्रथम अधिनियमों, जिनके द्वारा स्कॉटलैंड एवं आयरलैंड राज्य संयुक्त आंग्ल राज्य में सम्मिलित किए गए थे, में अंकित अनुबंधों द्वारा सीमित है। दूसरे विशेष उपनिवेशों को प्रभावित करने वाले न्यायिक अधिकार पत्र एक स्व-पत्रों एवं संविधियों द्वारा और तीसरे विचार-विमर्श द्वारा सीमित है कि कोई भी आंग्ल न्यायालय किसी प्रश्न का जिसमें उसे अपनी की को प्रवर्तित करने की शक्ति नहीं है, विनियम नहीं करेगा।
हर एक विशेष न्यायालय की अधिकारिता वही है जो राजा ने उसके लिए प्रत्यायोजित की और वह प्रत्यायोजित पूर्ण है, क्योंकि राजा अपनी समस्त अभियोजन शक्ति विभिन्न न्यायालयों में वितरित कर चुका है।
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