सामान्य विधि - Page 325

1. सामान्य विधि

सामान्य विधि

सामान्य विधि का साम्या से संबंध

  1. इंग्लिश प्रणाली में साम्या का एक तकनीकी गुणार्थ हो गया है और इसके संबंध में सामान्य विधि-सिद्धांतों से पृथक संपूर्ण न्याय व्यवस्था के रूप में विचार करने के लिए अभ्यस्त हो गए हैं।

  2. अच्छाई हो या बुराई - आंग्ल विधि का निर्झर दो स्रोतों में विभक्त हो गया जो देश किसी द्वीप के पर्याप्त उथल-पुथल से और जलाशयों की गहनता से रहित नहीं है।

  3. किंतु विधि एवं साम्या (ईक्विटी) की परस्पर निर्भरता कभी भी पूर्णतः विलुप्त नहीं हो पाई है।

  4. हमें सामान्य विधि एवं साम्या को परस्पर प्रतिद्वंद्वी प्रणालियों पर कभी नहीं सोचना चाहिए।

वह सिद्धांत जिसके अनुसार साम्या न्यायालय अनुतोष प्रदान करता है।

  1. यदि हम एक सामान्य सिद्धांत खोजते हैं, जिसने चान्सरी न्यायालय (उच्च न्यायालय) द्वारा विकसित साम्या को किसी अन्य विधि से अधिक प्रभावित किया है तो हम उसे अंतःकरण की दार्शनिक एवं धर्म शास्त्रीय संकल्पना में पाते हैं।

  2. आंग्ल साम्या अंतःकरण के शासी नैतिक सिद्धांत के निर्देशन में व्यवस्थित होना आरंभ होती है।

  3. हम ऐसा नहीं मान सकते कि सभी चांसलर (न्यायाधीश) उस सिद्धांत के अनुपालन में अध्यवसायी एवं सुसंगत थे। ड्यूडर काल में उनमें से कुछेक ने पूर्ण स्वेच्छाचारिता से व्यवहार किया। हो सकता है इन सामयिक मतिभ्रंशों ने ही चांसलर के कद के बारे में सेल्डन के प्रायः उद्धृत किंतु संभवतः अर्द्धगंभीर उपहास को अभिप्रेरित किया हो। किंतु वे विचित्र नहीं थे। वह अंतःकरण जिसे चांसलर ने सदा अपने सन्मुख