सामान्य विधि - Page 347

330 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

ब से स के नाम समनुदिष्ट करता हैः ब, स के प्रति आबद्ध हो जाता है और स को उसे ब से वसूल करने का अधिकार मिल जाता है।

  1. एक समनुदेशन में तीन व्यक्ति होते हैंः-

(1) मूल स्वामी।

(2) मूल स्वामी के प्रति आबद्ध व्यक्ति।

(3) तीसरा व्यक्ति जिसको मूल स्वामी ने अधिकार अंतरित किया है। 3. अधिकार, अर्थात् व्यवहार्य संपत्ति विधिक या साम्यिक हो सकती है जैसे कि एक

वसीयती संपत्ति या न्यास निधि में हित।

  1. व्यवहार्य संपत्ति का समनुदेशन साम्या और सामान्य विधि द्वारा भिन्न माना जाता

था।

सामान्य विधि एवं व्यवहार्य संपत्ति

  1. सामान्य विधि में व्यवहार्य संपत्ति का समनुदेशन नहीं हो सकता था। केवल एक

व्यवहार संपत्ति का समनुदेश नहीं हो सकता था, वरन् एक विधिक संपत्ति का भी

समनुदेशन नहीं हो सकता था।

  1. कारण था वादों की बहुलता का भय।

  2. सांविधिक विधि एवं विशेष विधि ने कुछ प्रकार की व्यवहार्य संपत्तियों को

समनुदेशनीय बनायाः-

(1) परक्राम्य लिखित व्यापार विधि द्वारा समनुदेशनीय हो गई।

(2) जीवन बीमा और सागरीय बीमा पॉलिसियां संविधि द्वारा समनुदेशनीय बनाई

गई।

(3) धारा 25 (6) ज्युदिकेचर एक्टः सभी विधिक व्यवहार्य संपत्तियां समनुदेशनीय

बना दी गई हैं।

साम्या एवं व्यवहार्य संपत्ति

  1. साम्या में व्यवहार्य संपत्ति सर्वदा समनुदेशनीय थी। न केवल साम्या में एक व्यवहार्य

संपत्ति समनुदेशनीय थी, वरन् एक विधिक संपत्ति भी साम्या में समनुदेशनीय

थी।

  1. यदि संपत्ति साम्यिक होती थी तो समनुदेशनी उसे पुनः प्राप्त करने के लिए चांसरी

न्यायालय में अपने नाम से ही वाद ला सकता था।

  1. यदि वह विधिक संपत्ति होती थी तो कार्यवाहियां समनुदेशक के नाम से जारी

होती थीं। और वह ढंग जिससे चांसरी न्यायालय ने हस्तक्षेप किया था, समनुदेशक