370 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
या जो अपराधिक कार्य से ऐसा एक संबंध रखता है कि वह समुचित रूप से, अभियुक्त, जो अनुवीक्षित किया जा रहा है, के साथ किया जा सकता है। 27 मद्रास, 271
धारा 120 एवं 133 का प्रभाव
धाराएं साक्ष्य देने को सक्षम होने के रूप में खास व्यक्तियों की गणना करती है। प्रश्न है, क्या अन्य व्यक्ति सक्षम नहीं है? धारा अभिप्राय से समझी जाने वाली नहीं है कि केवल ये ही व्यक्ति सक्षम है और अन्य नहीं है। धाराओं का प्रभाव है कि सभी व्यक्ति, उन धाराओं 120 एवं 133 में वर्णित को समाविष्ट करते हुए, सक्षम हैं।
इन वर्गों के साथ विशिष्टतः व्यवहार करना क्यों आवश्यक है। कारण है क्योंकि पूर्ववर्ती विधि में वे असक्षम थे। उनके प्रति लगा प्रतिबंध हटाया जाना था, अतः उनसे संबंधित विशिष्ट अनुबंध हैं। व्यक्तियों के अन्य वर्ग पहले से ही सक्षम समझे जाते थे और इसलिए उनके संबंध में कुछ भी कहना अनावश्यक था।
धारा 120 एवं 133 का प्रभाव यह है कि न केवल
(1) मामलों के पक्षकार।
(2) पति एवं पत्नी।
(3) सह अपराधी।
सक्षम साक्षी हैं वरन्
(1) जूरी एवं असेसर - धारा 294 भा.दं.प्र.सं.
(2) एक वसीयत का निष्पादक
(3) एक पक्षकार के लिए अधिवक्ता
एक मामले में जिसके वे पक्षकार हैं, में सक्षम साक्षी हो सकते हैं, यद्यपि वह एक मामले में जिसमें वे हितधारक हैं, भी एक कारण है।
साक्ष्य, शपथ पर ही दिया जाना चाहिए
शपथ भारतीय साक्ष्य अधिनियम की एक आवश्यकता नहीं है। भारतीय साक्ष्य अधिनियम से छूट एक साक्षी का साक्ष्य विधिक साक्ष्य होगा, यद्यपि साक्षी द्वारा बिना शपथ लिए साक्ष्य दिया गया था।
शपथ 1873 के दशम् भारतीय शपथ अधिनियम की अपेक्षा है। शपथ अधिनियम की धारा 5 निर्धारित करती है।
यह कि शपथ प्रतिज्ञान निम्नोक्त व्यक्तियों द्वारा की जाएगी।
(अ) सभी साक्षीगण।
(ब) व्याख्यातागण।