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(स) जूरीगण।
धारा 6 - एक व्यक्ति जो शपथ का प्रतिज्ञान करने का प्रतिवाद करता है को अनुज्ञात करती है।
धारा 14 - किसी न्यायालय या प्राधिकृत व्यक्ति के समक्ष शपथ या प्रतिज्ञान होने पर साक्ष्य देने वाला प्रत्येक व्यक्ति ऐसे विषय पर सत्य व्यक्त करने के लिए बाध्य होगा।
तीन प्रश्न हैं जो विचार के लिए उठते हैं।
(1) क्या एक न्यायालय, एक साक्षी को शपथ या प्रतिज्ञान कराना अस्वीकार कर सकती है?
(2) क्या एक पक्षकार, शपथ लेना या प्रतिज्ञान करना अस्वीकार कर सकता है?
(3) एक साक्षी द्वारा शपथ लेने या प्रतिज्ञान करने से इन्कार और एक न्यायालय की शपथ कराने में असफलता का प्रभाव।
प्रश्न 1 का उत्तर। शपथ दिलाना न्यायालय का सांविधिक कर्त्तव्य है।
यह एक गुण है, जैसे न्यायालय, एक व्यक्ति जो सक्षम है को साक्ष्य दिलाने के लिए बाध्य है और एक व्यक्ति जो असक्षम है को दिलाने के लिए बाध्य नहीं है, अर्थात् एक बच्चा।
6 पट. एल.जे. 147
प्रश्न 2 का उत्तर। उत्तर धारा 12 में दिया गया है। पक्षकार बनाने के लिए विवश नहीं किया जाएगा। किंतु न्यायालय को उसके द्वारा इन्कार एवं दिए गए कारणों, यदि कोई हो, का एक लेखा जोखा बनाना है।
प्रश्न 3 का उत्तर -
भाग I - पक्षकार के शपथ लेने या (1) प्रतिज्ञान करने से इन्कार करने का प्रभाव,
(2) ऐसा इन्कार केवल साक्ष्य की उपयोगिता को प्रभावित करता है।
भाग II - न्यायाधीश को शपथ देने में असफलता का प्रभाव।
(1) साक्ष्य ग्राह्य रहता है।
(2) सत्य बोलने की जिम्मेदारी रहती है।
- भारत में शपथ अधिनियम की धाराएं इतनी दृढ़ नहीं हैं जैसे इंग्लैंड में हैं।
(1) शपथ सत्य बोलने के दायित्व के लिए एक आवश्यक प्रतिबंध नहीं है। मात्र