सामान्य विधि - Page 403

386 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

मुख्य परीक्षण में, साक्षी से मात्र ऐसे प्रश्न ही पूछने चाहिए।

जैसे फ्आपने क्या देखा?य् फ्आपने क्या सुना?य् फ्आगे क्या घटित हुआ?य्

नियम के लिए कारण -

  1. एक साक्षी, उसको बुलाने वाले पक्षकार के हित में पक्षपात रखता है और प्रतिपक्षी के लिए बैर रखता है। अतः वह संभवतः पक्षकार के अधिवक्ता द्वारा सुझाए गए उत्तरों को देने को सहमत है।

  2. यह कि एक साक्षी को बुलाने वाला पक्षकार उसके प्रतिपक्षी पर एक लाभ रखता है यह पहले ही जानने में जो साक्षी प्रमाणित करेगा, या कम से कम प्रमाणित करने की आशा की जाती है, और कि, फलतः यदि वह सूचक हेतु अनुमत किया जाए, वह उससे ऐसे ढंग से परिप्रश्न कर सकता था जैसे केवल साक्षी की जानकारी का इतना निकाल लेने के लिए जितना उसके पक्ष के लिए हितकर होगा, या समूचे पर असत्य का मुलम्मा भी चढ़ा देगा।

नियम के अपवाद -

मुख्य-परीक्षण में सूचक प्रश्न निम्नोक्त मामलों में अनुज्ञेय हैंः-

(i) जहां विषय मात्र परिचयात्मक हैं, जैसे कि नाम, साक्षी का व्यवसाय।

(ii) व्यक्ति या वस्तुओं का अभिज्ञान।

(iii) उन मामलों के विषय में जो विवाद में नहीं है।

(iv) जब एक प्रश्न उसके यथार्थ लक्षण से एक सूचक रूप के अतिरिक्त नहीं किया जा सकता हो।

(v) दूसरी ओर से पूर्वतः एक साक्षी द्वारा दिए साक्ष्य को खंडित करने हेतु। जैसेः- यदि वादी शपथ लेता है कि प्रतिवादी ने कहा था, फ्माल पूरे का पूरा नमूने के समान होना आवश्यक नहीं हैय्। प्रतिवादी से पूछा जा सकता है और पूछा जाना चाहिए भी। फ्क्या आपने वादी से कभी कहा कि माल पूरे का पूरा नमूने के समान होना आवश्यक नहीं या उसी प्रभाव के अन्य शब्दों मेंय्?

(vi) जहां साक्षी प्रतिकूल है। प्रतिकूल एवं हितकर साक्षी के बीच अंतर है।

एक साक्षी को जो घटित हुआ उसकी अपनी स्मृति के अनुसार व्यक्त करना चाहिए, और जो उससे कहा गया है के अनुसार नहीं।

मान लो, साक्षी तथ्यों का स्मरण नहीं कर सकता है, और उसकी स्मरण शक्ति असफल हो जाती है, तो क्या किया जाना चाहिए?

दो उपाय सामने हैंः