385
यह विषय साक्षी से प्रश्न करने वाले पक्षकार के विवेक पर नहीं छोड़ा गया है, वरन् विधि द्वारा विनियमित किया जाता है।
प्रश्न करने की पद्धति के दृष्टिकोण से, प्रश्न या तो सूचक प्रश्न हैं या असूचक प्रश्न हैं।
एक सूचक प्रश्न समानरूपतः एक ऐसा प्रश्न कहलाता है, जिसका मात्र हां या ना में उत्तर दिया जा सकता है। यद्यपि सभी ऐसे प्रश्न निसंदिग्ध रूप में इस नियम के अंतर्गत आते हैं, सूचक प्रश्न का लक्षण उनसे परिबद्ध नहीं हैं।
साक्ष्य अधिनियम एक सूचक प्रश्न की परिभाषा करता है एक रूप में जो एक विशेष उत्तर को सुझाता है, जिसे प्रश्नकर्त्ता साक्षी से प्राप्त करने की आशा करता है।
दृष्टांतः-
चाकू घोंपकर हत्या के एक आरोप पर, साक्षी से प्रश्न करता है, क्या आपने अभियुक्त को खून से लथपथ और हाथ में चाकू लिए शव के पास से आते हुए देखा था एक सूचक प्रश्न है।
- दो प्रकार के सूचक प्रश्नों के बीच एक प्रभेद अवश्य करना चाहिए?
(i) एक सूचक प्रश्न जो उत्तर सुझाता है।
(ii) एक सूचक प्रश्न जो साक्षी का ध्यान विषय की ओर जिसके संबंध में उससे प्रश्न किया जाता है, निर्देशित करता है।
दूसरे प्रकार के सूचक प्रश्न को दृष्टांत के रूप में, निम्नोक्त को लेकर अ पर ब द्वारा मानहानि के लिए मुकद्दमा किया गया था, स से एक वार्तालाप में कहने के लिए कि ब दिवालिया परिस्थितियों में था और कि उसका नाम लन्दन राजपत्र (गजट) में दिवालियों में प्रकाशित होगा। साक्षी से प्रश्न पूछा गया था।
फ्क्या राजपत्र के बारे में कोई बात कही गई थी?य्
एक प्रश्न के तात्पर्य में, जो एक उत्तर सुझाता है, यह एक सूचक प्रश्न नहीं है। यह एक सूचक प्रश्न है जो साक्षी का ध्यान निर्देशित करता है, उस विषय की ओर जिसके बारे में उससे प्रश्न किया जा रहा है।
मुख्य परीक्षण में परिप्रश्न का ढंग, प्रतिपरीक्षण में जांच के ढंग से परिवर्तित होता है।
प्रतिपरीक्षण में, एक साक्षी से सूचक प्रश्न के रूप में परिप्रश्न किया जा सकेगा। किंतु सूचक प्रश्न मुख्य परीक्षण में नहीं पूछना चाहिए, यदि प्रतिवादी पक्षकार द्वारा प्रतिवादित किया जाता है।