388 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
आधार जिन पर प्रतिपक्षी को निरीक्षण करने को अनुज्ञात किया जाता है त्रिविध हैं ः- (i) साक्षी की तथ्यों के संबंध में स्मृति का पूर्ण लाभ सुनिश्चित करना, (ii) अनुपयुक्त प्रलेख के उपयोग को रोकना एवं (iii) उसके लिखित शब्दों से उसके मौखिक साक्ष्य की तुलना करना।
क्या प्रतिपक्षी साक्षी के लेखन का संदर्भ लेने से उसकी स्मृति को जागृत करने को बाध्य कर सकता है?
एक अभियुक्त व्यक्ति के लिए वह बहुत लाभप्रद हो सकता है कि पुलिस अधिकारी कुछ तथ्यों को व्यक्त करेगा। पुलिस अधिकारी तथ्य का स्मरण नहीं करता और वह अपनी डायरी का संदर्भ लेने से स्मृति को जागृत नहीं करेगा।
(8 कलकत्ता 154), (8 कलकत्ता 739) कहता है वह बाध्य नहीं किया जा सकता।
ए.आई.आर. (1924) पट. 829 कहता है वह बाध्य किया जा सकता है।
एक साक्षी के परीक्षण पर सीमाबंधन
इस शीर्षक के अंतर्गत विचार किए जाने की विषय-वस्तु इन प्रश्नों से संबंध रखती है, एक साक्षी उत्तर देने को बाध्य है या बाध्य नहीं है।
सामान्य नियम है कि एक साक्षी को, उससे किए गए सभी प्रश्नों के उत्तर अवश्य देने चाहिए।
धारा 132
धारा 132 विषय को नकारात्मक ढंग से प्रस्तुत करती है।
- यह नियम दो योग्यताओं के अधीन हैः
(i) कुछ प्रश्न, जिनका एक साक्षी को उत्तर देने को विवश नहीं किया जा सकता।
(ii) कुछ प्रश्न, जिनका एक सक्षी उत्तर देने को अधिकृत नहीं है।
धाराएं जो उन प्रश्नों के साथ संबंध रखती हैं, जिनका उत्तर देने को विवश नहीं किया जा सकताः 121, 122, 124, 125, 129
धाराएं जो उन प्रश्नों के साथ संबंध रखती हैं जिनका उत्तर देने को एक साक्षी अधिकृत नहीं हैः 123, 126, 127, 128
प्रमाण के भार का उन्मोचन
- साक्ष्य का प्रभाव हो सकता हैः
(i) एक तथ्य को प्रमाणित करना।
(ii) एक तथ्य को अप्रमाणित करना।