44 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
सिविल प्रक्रिया संहिता दंड प्रक्रिया संहिता
(2) इस धारा के अंतर्गत एक पक्षीय पारित एक अपीलीय डिक्री से अपील स्वीकार की जा सकती है।
धारा 104
(1) निम्न आदेशों से एक अपील स्वीकार्य होगी, और उस संहिता के कलेवर या तत्समय के लिए प्रवर्तित किसी विधि द्वारा स्पष्टतः प्रावधानित से अन्यथा के बिना किसी भी अन्य आदेशों से नहींः
(a) जहां न्यायालय द्वारा अनुमत कालावधि में पंचाट परिपूर्ण नहीं किए जाने पर पीछे जाने वाला आदेश_
(b) एक विशेष वाद के रूप में व्यक्त एक पंचाट पर एक आदेश_
(c) पंचाट को उपांतरित और शुद्ध करते हुए एक आदेश_
(d) मध्यस्थता को संदर्भित करने वाले इकरारनामे को पत्रावली में रखने या न रखने का आदेश_
(e) मध्यस्थता को संदर्भित करने के लिए एक वाद जहां एक इकरारनामा है, को स्थगित करने या न करने का एक आदेश_
(f) न्यायालय के हस्तक्षेप के बिना मध्यस्थता के पंचाट को पत्रावली में रखने या रखने को अस्वीकार करने का एक आदेश_
(ff) धारा 32 A के अधीन एक आदेश_
(g) धारा 95 के अधीन एक आदेश_
(h) जहां ऐसी गिरफतारी या संरोध एक डिग्री के निष्पादन में है, के अतिरिक्त किसी
धारा 408 कोई व्यक्ति एक सहायक सत्र न्यायाधीश, एक जिला मजिस्ट्रेट, और किसी अन्य प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट द्वारा धारित अन्वीक्षण में दोष सिद्ध या धारा 349 के अधीन दंडादेशित व्यक्ति या जिसके संबंध में एक आदेश किया गया है या धारा 380 के अधीन एक प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट द्वारा दंडादेश पारित किया गया है, सत्र न्यायालय में अपील कर सकता है। निम्नानुसार प्रतिबंधितः
* * * * * (ब) जब किसी वाद में एक सहायक सत्र न्यायाधीश या धारा 30 के अधीन विशेष रूप से अधिकृत मजिस्ट्रेट चार वर्ष से अधिक कारावास का दंडादेश या निर्वासन का दंडादेश पारित करता है, तो सबकी या किसी ऐसे अन्वीक्षण में दोषसिद्ध अभियुक्त की अपील उच्च न्यायालय में स्वीकार्य होगी।
(स) यदि कोई व्यक्ति धारा 124 A के अधीन अपराध के कारण दोषसिद्ध होता है तो अपील उच्च न्यायालय में स्वीकार्य होगी।
धारा 409 सत्र न्यायालय या सत्र न्यायाधीश की अपील सत्र न्यायाधीश या अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश द्वारा सुनी जाएगीः परंतु कि, अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश केवल ऐसी अपीलों को सुनेगा जैसे कि प्रांतीय सरकार सामान्य या विशेष आदेश द्वारा निर्देशित कर सकता है, या जैसा कि