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छुआछूत और दासता के बीच दूसरा या सही मामलों में तीसरा अन्तर यह है कि दासता कभी भी बन्धनात्मक अथवा आवश्यक नहीं रही थी। किन्तु छुआछूत बंधन या आवश्यकता है। किसी भी व्यक्ति को दूसरे व्यक्ति को अपना दास बनाने की अनुमति है। परन्तु यदि वह किसी को दास नहीं बनाना चाहता तो उस पर कोई बन्धन या मजबूरी नहीं है। इसके विपरीत किसी को अछूत मानना एक हिन्दू की मजबूरी है। यह उसके लिए बाध्यता है जिसे उसे मानना होगा, भले ही वह उसे न चाहता हो।
---समाप्त---1.4.16