8 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
स्कूल के चपरासी की उपस्थिति आवश्यक थी क्योंकि वही एक ऐसा आदमी था जिसे कक्षा-अध्यापक इस काम के लिए इस्तेमाल कर सकता था। यदि चपरासी उपलब्ध नहीं होता था, तो मुझे बिना पानी के रहना पड़ता। इस स्थिति को संक्षेप में इस प्रकार बयान किया जा सकता है - चपरासी नहीं तो पानी नहीं। मैं जानता हूँ कि घर में कपड़े धोने का काम मेरी बहनें करती थीं। ऐसी बात नहीं है कि सतारा में कोई धोबी नहीं था। ऐसी बात भी नहीं कि हम धोबी को पैसे नहीं दे सकते थे। मेरी बहनें इसलिए कपड़े धोती थीं कि हम अछूत थे और कोई धोबी किसी अछूत के कपड़े नहीं धोता था। मेरे तथा अन्य लोगों के बाल काटने या हजामत बनाने का काम मेरी बड़ी बहन करती थी जो हामरे बाल काटते-काटते बाल काटने में माहिर हो गई थी। इसका कारण यह नहीं था कि सतारा में कोई नाई नहीं था और न ही इसका यह कारण था कि हम नाई को पैसे नहीं दे सकते थे। हजामत बनाने और बाल काटने का काम मेरी बहन इसलिए करती थी कि हम अछूत थे और कोई नाई अछूत के बाल काटने को तैयार नहीं था। यह सब जानते थे। इस घटना से मुझे इतना अधिक धक्का लगा जितना पहले कभी नहीं लगा था और इससे पहले मैं छुआछूत को अन्य सवर्णों और अछूतों की तरह एक आम बात समझता था। लेकिन इस घटना ने मुझे छुआछूत के बारे में सोचने के लिए बाध्य किया।