30 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
अध्ययन किया जाना चाहिएः 1. सरकार का गठन, 2. नागरिकों के विरुद्ध सरकार के अधिकार तथा 3. सरकार के विरुद्ध जनता के अधिकार। मैं संवैधानिक-विधि की इन सीमाओं और विस्तार को ध्यान में रखते हुए इन व्याख्यानों में भारत सरकार अधिनियम का अध्ययन करना चाहता हूं और प्रो. आनसन ने भी अंग्रेजी संविधान के अध्ययन में इन्हीं दृष्टिकोणों को अपनाया है।
एक अन्य प्रश्न का उठना आवश्यक है जिसका प्रारम्भ में ही समाधान करना बेहतर है। विषय को ऐतिहासिक या वर्णनात्मक रूप में लिया जाए। भारत सरकार अधिनियम के अध्ययन में कुछ ऐतिहासिक तथ्यों को तो छोड़ा नहीं जा सकता है। भारत सरकार अधिनियम में कहा गया है कि ईस्ट इंडिया कम्पनी के विरुद्ध जो उपचार उपलब्ध थे वे राज्य सरकार के सचिव के विरुद्ध भी उपलब्ध रहेंगे। भारत सरकार अधिनियम में यह भी कहा गया है कि महामहिम लेटर्स पेटेंट के द्वारा उच्च न्यायालय की स्थापना कर सकता है। लेटर्स पेटेंट में कहा गया है कि उच्च न्यायालय, उच्चतम न्यायालय की उन सभी श्िक्तयों का प्रयोग करेगा जिनका उसने अधिग्रहण किया है। भारत सरकार के अधिनियम से इसी प्रकार के कई अन्य खण्डों का उल्लेख किया जा सकता है। लेकिन जिन दो खण्डों का उल्लेख किया गया है वे यह स्पष्ट करने के लिए पर्याप्त हैं कि इतिहास अपरिहार्य है। इसका कारण यह है कि भारत के संविधान पर विचार करने और राज्य-सचिव के विरुद्ध उपलब्ध उपचारों को समझने के लिए यह मानना आवश्यक है कि जनता की ईस्ट इंडिया कंपनी के विरुद्ध एक नागरिक को क्या उपचार उपलब्ध थे। इसी प्रकार, जब तक यह मालूम नहीं होता कि उच्चतम न्यायालय को क्या शक्तियाँ प्राप्त थीं, उच्च न्यायालय की शक्तियों को समझना कठिन है। यद्यपि कुछ इतिहास जानना आवश्यक है, किन्तु प्रचलित संवैधानिक-विधि का अध्ययन करने के लिए इसके हर भाग का ऐतिहासिक दृष्टि से अध्ययन करना आवश्यक नहीं है। पूरा इतिहास जानना वर्तमान के लिए महत्त्वपूर्ण नहीं है। केवल मूल प्रासंगिक भाग का उल्लेख पर्याप्त है और जब किसी विशेष प्रश्न को ठीक से समझने के लिए इसका ऐतिहासिक विचार आवश्यक है, तो मैं ऐसा ही करूँगा।
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