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कुंठा

इतिहास इस बात का गवाह है कि अछूत बहुत ही हतोत्साहित, बहुत ही घृणित और बहुत ही अभागे हैं। वे बहुत ही थके-माँदे और त्यक्त लोग हैं।

शैली की भाषा में फ्आकाश पर चढ़ाई की थकावट के कारण उनका रंग पीला पड़ गया है, उनकी आँखें पृथ्वी की ओर लगी हुई हैं और वे भिन्न प्रकार के सितारों के बीच अकेले घूम रहे हैं।य्

साधारण भाषा में कहा जा सकता है कि अछूत कुंठा की भावना से ओत-प्रोत है। जैसा कि मैथ्यू आरनोल्ड ने कहा हैः फ्जीवन अपने अस्तित्व की पुष्टि करने का प्रयास है, इसका अर्थ अपने अस्तित्व का पूरी तरह और निर्बाध रूप से विकास करना, पर्याप्त वायु और प्रकाश पाना, दूसरों को अपने ऊपर न होने देना (............) [*] । अपने अस्तित्व की पुष्टि न कर पाना कुंठा का दूसरा नाम है। इसका अर्थ अच्छे परिणाम दिखाने के प्रयासों का पूरा न होना, किसी की शक्तियों का शिथिल पड़ जाना और व्यक्तित्व को अचेत कर देना है।य्

बहुत से लोग अपने जीवन में ऐसी कुंठाओं के शिकार होते हैं। लेकिन वे तुरंत ही अंधकार से निकल आते हैं और अपने कम्पन से पुनः यश प्राप्त करते हैं। अछूतों की स्थिति दूसरी है। उनके मामले में एक बार कुंठा से हमेशा के लिए कुंठा अभिप्रेत है। समय या स्थान से इसमें कोई अंतर नहीं पड़ता।

इस संबंध में अछूतों की कहानी यहूदियों की कहानी से बिल्कुल भिन्न है।

यहूदी लोगों को मिस्र में बंदी बनाया जाना उनके लिए पहली विपत्ति थी। जैसा कि बाईबल में कहा गया है -

1. प्रजातंत्र संबंधी लेख।

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