7. कुंठा - Page 77

62 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

(बच्चों की बाइबिल - पृष्ठ 30) (उद्धरण नहीं दिया गया - संपादक)

अंततः मिश्र का राजा झुक गया। यहूदी लोग कैद होने से बच गए और कैन्मान चले गए जहाँ वे ऐसे प्रदेश में बस गए जिसमें दूध और मधु की भरमार थी।

यहूदियों के सामने दूसरी विपत्ति तब आई जब उन्हें बेबीलोनिया में बंदी बना

लिया गया। (कुछ पृष्ठ गायब हैं - सम्पादक)

अब हम बता सकते हैं कि अछूत कुंठा से क्यों पीडि़त हैं। उनके शरीर व दिमाग की हालत बहुत अच्छी नहीं है। उन्हें अपना भूतकाल भी नीरस लग रहा है और उसके आधार पर वे यह आशा नहीं कर सकते कि उनका भविष्य उज्ज्वल होगा और वे उत्थान कर सकेंगे। इसमें उनका कोई दोष नहीं है। उनके नसीब में जो कुंठा आई है उसका कारण हिन्दू सामाजिक-व्यवस्था से उतपन्न प्रतिकूल सामाजिक वातावरण है जो उनकी प्रगति के लिए पूर्णतया प्रतिकूल है। नसीब उनका पूर्णतया असहनीय है।

(टिप्पणी पेज 201) (उद्धरण नहीं दिया गया - सम्पादक)

जैसा कि कार्लाइल ने कहा है - ‘‘कुछ लोग हिन्दू सामाजिक व्यवस्था को उखाड़ फेंकने के लिए क्रांति यहाँ तक कि खूनी क्रांति की बात सोच रहे हैं। सभी यही कह रहे हैं जो कभी काबली विलियम्स ने कहा था-वे ऐसे ही तीव्र कुंठा से ग्रस्त हैं।’’

(टिप्पणी पृष्ठ 152) (उद्धरण नहीं दिया गया - सम्पादक)

III

एमर्सन की भाषा में भगवान के साथ प्रसंविदा का अर्थ तन-मन की अच्छी स्थिति से लगाया जा सकता है। जैसा कि एमर्सन ने कहा है, फ्सफलता तन और मन की अच्छी दशा पर, कार्य की शक्ति-साहस पर निर्भर है। सफलता तभी मिलती है जब कोई ठोस शक्ति होः एक आँस शक्ति एक आँस वजन के बराबार होनी चाहिए।य्

यहूदी पहली बार बंदी बनाए जाने के बाद उन्नति कर सके तो इसका मुख्य कारण उनके तन और मन की हालत अच्छी होना था। तन और मन की अच्छी हालत दो स्रोतों से होती है। यह भगवान पर विश्वास करने से हो सकती है। यदि कुछ भी नहीं तो कम से कम भगवान शक्ति का एक स्रोत है एवं आपतकाल में व्यक्ति को मानसिक-शक्ति की, तन और मन की अच्छी स्थिति की आवश्यकता होती है, जो सफलता के लिए आवश्यक है। अतः यदि ठीक अर्थ लगाया जाए तो इस सुझाव में कोई बुराई नहीं है कि यहूदी भगवान के साथ अपने प्रसंविदा के कारण सफल हुए।