भाग-3 - मूल अधिकार - Page 132

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(iii) आर्थिक व्यवस्था इस प्रकार चले जिसमें धन और

उत्पादन-साधनों का सर्वसाधारण के लिए अहितकारी

सकेन्द्रण न हो_

(iv) पुरुषों और स्त्रियों दोनों का समान कार्य के लिए समान

वेतन हो_

(v) पुरुष और स्त्री कर्मकारों के स्वास्थ्य और शक्ति का तथा

बालकों की सुकुमार अवस्था का दुरुपयोग न हो और

आर्थिक आवश्यकता से विवश होकर नागरिकों को ऐसे

रोजगारों में न जाना पड़े जो उनकी आयु या शक्ति के

अनुकूल न हों_

(vi) बालकों और अल्पवय व्यक्तियों की शोषण से तथा

नैतिक और आर्थिक परित्याग से रक्षा की जाए।

कुछ दशाओं 32. राज्य अपनी आर्थिक सामर्थ्य और विकास की सीमाओं में काम, शिक्षा के भीतर काम पाने के, शिक्षा पाने के और बेकारी, और लोक सहायता बुढ़ापा, बीमारी और निःशक्तता तथा अन्य अनर्ह अभाव पाने का अधिकार की दशाओं में लोक सहायता पाने के अधिकार को प्राप्त

कराने का प्रभावी उपबंध करेगा।

काम की 33. राज्य काम की न्यायसंगत और मानवोचित दशाओं को न्यायसंगत और सुनिश्चित करने के लिए और प्रसूति सहायता के लिए मानवोचित दशाओं उपबंध करेगा।

का तथा प्रसूति

सहायता का उपबंध

कर्मचारियों के 34. राज्य, उपयुक्त विधान या आर्थिक संगठन द्वारा या किसी लिये निर्वाह अन्य रीति से कृषि के, उद्योग के या अन्य प्रकार के सभी मजदूरी आदि कर्मकारों को काम, निर्वाह मजदूरी, शिष्ट जीवन स्तर

और अवकाश का सम्पूर्ण उपभोग सुनिश्चित करने वाली

काम की दशाएं तथा सामाजिक और सांस्कृतिक अवसर

प्राप्त कराने का प्रयास करेगा।

नागरिकों के 35. राज्य भारत, के समस्त राज्यक्षेत्र में नागरिकों के लिए एक लिये एक समान समान सिविल संहिता प्राप्त कराने का प्रयास करेगा। सिविल संहिता