128 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
अध्याय 2 संसद
साधारण
संसद का गठन 66. संघ के लिए एक संसद होगी जो राष्ट्रपति और दो सदनों
से मिलकर बनेगी जिसके नाम क्रमशः राज्यसभा और
लोकसभा होंगे।
संसद के सदनों 67. (1) राज्यसभा दो सौ पचास सदस्यों से मिलकर बनेगी जिनमें की रचना से-
(क) पन्द्रह सदस्य, इस अनुच्छेद के खंड (2) में उपबंधित
रीति से राष्ट्रपति द्वारा नामनिर्देशित किए जाएंगे_ और
(ख) शेष सदस्य राज्यों के प्रतिनिधि होंगेः परंतु पहली अनुसूची
के भाग- III में तत्समय विनिर्दिष्ट राज्यों के प्रतिनिधियों
की कुल संख्या इस शेष संख्या के चालीस प्रतिशत से
अधिक नहीं होगी।
* (2) इस अनुच्छेद के खंड (1) के उपखंड (क) के अधीन
राष्ट्रपति द्वारा नाम निर्देशित किए जाने वाले सदस्य ऐसे
व्यक्ति होंगे जिन्हें निम्न प्रकार के विषयों के बारे में
विशेष ज्ञात या व्यावहारिक अनुभव है, अर्थात्-
(क) साहित्य, कला, विज्ञान और शिक्षा_
(ख) कृषि, मत्स्य पालन और सम्बद्व विषय_
(ग) इंजीनियरी और वास्तु कला_
* . समिति की राय है कि राष्ट्रपति द्वारा राज्यसभा में विशेष हितों का प्रतिनिधित्व करने के लिए अधिक
से अधिक प्रंद्रह सदस्यों के नाम निर्देशित किए जाने चाहिएं तथा प्रौढ़ मताधिकार की दृष्टि से श्रम,
या वाणिज्य और उद्योग के लिए कोई विशेष प्रतिनिधित्व आवश्यक नहीं है। समिति समझती है कि
आयरिश संविधान के अधीन अब तक प्रवृत्त निर्वाचन की पैनल पद्धति व्यवहार में बहुत असंतोषजनक
साबित हुई है। इस विषय में अन्य किसी मार्गदर्शन के लिए उपबंध किया है, जबकि काम-चलाऊ
प्रतिनिधित्व के कुछ अध्याय अपना लिए हैं। चूंकि समिति को निर्वाचन की जगह नामनिर्देशन रखना
पड़ता है और चूंकि समिति का विचार है कि श्रम या वाणिज्य और उद्योग के लिए विशेष प्रतिनिधित्व
आवश्यक नहीं है इसलिए समिति की राय है कि पंद्रह नामनिर्देशित सदस्यों के लिए उपबंध करना
काफी होगा।