अध्याय-4 - संघ की न्यायपालिका - Page 171

152 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

रुप में पद धारण किया है, भारत के राज्यक्षेत्र के भीतर

किसी न्यायालय में या किसी प्राधिकारी के समक्ष

अभिवचन या कार्य नहीं करेगा।

न्यायाधीशों 104. उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश वेतन और भत्तों के के वेतन आदि लिए तथा छुट्टियों और पेंशन की बाबत ऐसे अधिकारों

के लिए हकदार होंगे जो संसद द्वारा बनाई गई विधि द्वारा

या उसके अधीन समय-समय पर नियत किए जाएं। जब

तक इस निमित्त कोई उपबंध नहीं किया जाता, तब तक

वे वेतन, भत्ते और छुट्टियों या पेंशन की बाबत ऐसे

अधिकारों के लिए हकदार होंगे जो दूसरी अनुसूची में

विनिर्दिष्ट हैंः

परंतु किसी न्यायाधीश के वेतन अथवा छुट्टियों या पेंशन

की बाबत उसके अधिकारों में उसकी नियुक्ति के पश्चात्

उसके लिए अलाभकारी परिवर्तन नहीं किया जाएगा।

कार्यकारी मुख्य 105. जब भारत के मुख्य न्यायमूर्ति का पद रिक्त है या जब न्यायमूर्ति की मुख्य न्यायमूर्ति, अनुपस्थिति के कारण या अन्यथा अपने नियुक्ति पद के कर्तव्यों का पालन करने में असमर्थ है तब

न्यायालय के अन्य न्यायाधीशों में से ऐसा एक न्यायाधीश,

जिसे राष्ट्रपति इस प्रयोजन के लिए नियुक्त करे, उस पद

के कर्तव्यों का पालन करेगा।

तदर्थ न्यायाधीशों 106. (1) यदि किसी समय उच्चतम न्यायालय के सत्र को आयोजित की नियुक्ति करने या चालू रखने के लिए उस न्यायालय के न्यायाधीशों

की गणपूर्ति प्राप्त न हो तो भारत का मुख्य न्यायमूर्ति,

राष्ट्रपति की पूर्व सहमति से और संबंधित उच्च न्यायालय

के मुख्य न्यायमूर्ति से परामर्श करने के पश्चात्, किसी

उच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त होने के लिए

सम्यक रुप से अर्हित है और जिसे भारत का मुख्य

न्यायमूर्ति नामोदिष्ट करें, न्यायालय की बैठकों में उतनी

अवधि के लिए, जितनी आवश्यक हो, तदर्थ न्यायाधीश

के रुप में उपस्थित करने के लिए लिखित रुप में अनुरोध

कर सकेगा।

(2) इस प्रकार नामोदिष्ट न्यायाधीश का कर्तव्य होगा कि वह