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अपने पद के अन्य कर्तव्यों पर पूर्विकता देकर उस समय
और उस अवधि के लिए, जिसके लिए उसकी उपस्थिति
अपेक्षित है, उच्चतम न्यायालय की बैठकों में, उपस्थित
हो और जब वह इस प्रकार उपस्थित होता है तब उसको
उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश की सभी अधिकारिता,
शक्तियां और विशेषाधिकार होंगे और वह उक्त न्यायाधीश
के कर्तव्यों का निर्वहन करेगा।
* उच्चतम न्यायालय 107. इस अध्याय में किसी बात के होते हुए भी, भारत का की बैठकों में मुख्य न्यायमूर्ति, किसी भी समय, इस अनुच्छेद के सेवानिवृत्त उपबंधों के अधीन रहते हुए किसी व्यक्ति से, जो न्यायाधीशों की उच्चतम न्यायालय या फेडरल न्यायालय के न्यायाधीश उपस्थिति का पद धारण कर चुका है, उच्चतम न्यायालय के
न्यायाधीश के रुप में बैठने और कार्य करने का अनुरोध
कर सकेगा और प्रत्येक ऐसे व्यक्ति को जिससे इस प्रकार
का अनुरोध किया जाता है, इस प्रकार बैठने और कार्य
करने के दौरान सभी अधिकारिता, शक्तियां और विशेषाधिकार
होंगे किन्तु उसे अन्यथा उस न्यायालय का न्यायाधीश
नहीं समझा जाएगाः
परंतु जब तक यथापूर्वोक्त व्यक्ति उस न्यायालय के
न्यायाधीश के रुप में बैठने और कार्य करने की सहमति
नहीं दे देता है तब तक इस अनुच्छेद की कोई बात उससे
ऐसा करने की अपेक्षा करने वाली नहीं समझी जाएगी।
उच्चतम न्यायालय 108. उच्चतम न्यायालय अभिलेख न्यायालय होगा और वह का स्थान दिल्ली में अथवा ऐसे अन्य स्थान या स्थानों में अधिविष्ट
होगा जिन्हें भारत का मुख्य न्यायमूर्ति राष्ट्रपति के
अनुमोदन से, समय-समय पर, नियत करे।
उच्चतम 109. इस संविधान के उपबंधों के अधीन रहते हुए उच्चतम न्यायालय न्यायालय को किसी अन्य न्यायालय के अपवर्जन पर की आरंभिक किसी विवाद में अधिभारित होगीः- अधिकारिता (क) भारत सरकार और एक अधिक राज्यों के बीच, या
* . सेवानिवृत्त न्यायाधीशों का नियोजन यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका की परिपाटी के
अनुरूप है।