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अध्याय 5
घोर आपात की दशाओं में उपबंध
घोर आपात 188. (1) यदि किसी समय किसी राज्य का राज्यपाल में राज्यपाल सहमत हो जाए कि ऐसा घोर आपात काल उत्पन्न हो की शक्ति गया है जो राज्य की शांति और प्रशांति के लिए संकट
है और राज्य का शासन इस संविधान के उपबंधों के
अनुसार चलाना संभव नहीं है तो वह उद्घोषणा द्वारा यह
घोषणा कर सकेगा कि वह अपने कृत्यों का पालन ऐसी
सीमा तक जो उद्घोषणा में विनिर्दिष्ट की जाए, उसे
विवेकानुसार किया जाएगा और ऐसी किसी उद्घोषणा में
ऐसे पारिणामिक और आनुषंगिक उपबंध भी अंतर्विष्ट
होंगे जो उसे राज्य में किसी निकाय या प्राधिकरण
विषयक द्वारा संविधान के किन्हीं उपबंधों का प्रवर्तन
पूर्णतः या भागतः निलम्बित करने के उपबंधों सहित
उद्घोषणा के उद्देश्यों को प्रभावी रुप देने के लिए
आवश्यक या वांछनीय प्रतीत होः
परंतु इस खंड में की गई कोई बात उच्च न्यायालयों
विषयक इस संविधान के किन्हीं उपबंधों का प्रवर्तन,
पूर्णतः या भागतः निलम्बित करने के लिए राज्यपाल को
प्राधिकृत नहीं करेगी।
(2) उद्घोषणा तुरंत राज्यपाल द्वारा राष्ट्रपति को संसूचित की
जाएगी जो उस पर या तो उद्घोषणा को प्रतिसंहृत कर
देगा या ऐसी कार्रवाई करेगा जैसी वह इस संविधान के
अनुच्छेद 278 के अधीन उसमें निहित आपात शक्तियों
का प्रयोग करते हुए समुचित समझे।
(3) इस अनुच्छेद के अधीन उद्घोषणा दो सप्ताह बीतने पर
प्रवर्तनशील नहीं रहेगी जब तक कि राज्यपाल या
राष्ट्रपति द्वारा लोक अधिसूचना द्वारा इससे पूर्व प्रतिसंहृत
न कर दी जाए।
(4) इस अनुच्छेद के अधीन राज्यपाल के कृत्यों का पालन
उसके द्वारा अपने विवेकानुसार किया जाएगा।