अध्याय 1 - विधायी संबंध, विधयी शक्तियों का वितरण - Page 237

218 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

समवती सूची कहा गया है) प्रगणित किसी भी

विषय के संबंधमें विधि बनाने की शक्ति है।

(3) दो पूर्वगामी खंडों के अधीन रहते हुए, पहली अनुसूची

के भाग 1 में तत्समय विनिर्दिष्ट किसी राज्य के विधानमंडल

को सातवीं अनुसूची में सूची 2 में (जिसे इस संविधान

में राज्य सूची कहा गया है) प्रगणित विषयों में से किसी

की बाबत ऐसे राज्य या उसके किसी भाग के लिए विधि

बनाने की अनन्य शक्ति है।

(4) संसद को भारत के राज्यक्षेत्र के किसी ऐसे भाग के लिए

जो पहली अनुसूची के भाग 1 या भाग 3 के अंतर्गत

तत्समय नहीं है, किसी भी विषय के संबंध में विधि

बनाने की शक्ति है चाहे वह विषय राज्य सूची में

प्रगणित विषय ही क्यों न हो।

* उच्चतम 218. संसद को उच्चतम न्यायालय के गठन, संगठन, उसकी न्यायालय के अधिकारिता और शक्तियों के बारे में विधि बनाने की संबंध में विधायन अनन्य शक्ति है।

कुछ अतिरिक्त 219. इस अध्याय में किसी बात के होते हुए भी संसद अपने न्यायालयों की द्वारा बनाई गई विधियों के या किसी विद्यमान विधि के स्थापना का जो संघ सूची में प्रगणित विषय के संबंध में है, अधिक उपबंध करने अच्छे प्रशासनक के लिए अतिरिक्त न्यायालयों की की संसद की शक्ति स्थापना का विधि द्वारा उपबंध कर सकेगी।

उच्च न्यायालयों 220. (1) अनुसूची के भाग 1 में तत्समय विनिर्दिष्ट राज्य के के गठन और विधानमंडल को किसी उच्च न्यायालय के गठन और संगठन के संबंध संगठन की बाबत जिसकी प्रधान पीठ ऐसे राज्य के में विधायन अंतर्गत हो, विधि बनाने की अनन्य शक्ति है।

(2) संसद की पहली अनुसूची के भाग 2 में तत्समय

विनिर्दिष्ट किसी उच्च न्यायालय के गठन और संगठन के

संबंध में जिसकी प्रधान पीठ किसी राज्य में है, विधि

बनाने की शक्ति है।

* . समिति के कुछ सदस्यों का विचार है कि अनुच्छेद 218, 220, 221 और 222 अनुच्छेद 217 की दृष्टि

से आवश्यक नहीं है।