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* उच्च न्यायालयों 221. (1) संसद को संघ सूची में प्रमाणित विषयों में से किसी के को अधिकारिता संबंध में किसी उच्च न्यायालय की अधिकारिता और और शक्तियों शक्तियों के बारे में विधि बनाने की अन्य शक्ति है। के संबंध में (2) पहली अनुसूची के भाग 1 में तत्समय विनिर्दिष्ट कि विधायन राज्य के विधान मंडल को जिसके संबंध में या किसी क्षेत्र
के संबंध में जिसके भीतर उच्च न्यायालय अधिकारिता
का प्रयोग करता है, ऐसे राज्य या क्षेत्र के संबंध में राज्य
सूची में प्रगणित विषयों में से किसी की बाबत ऐसे उच्च
न्यायालय की अधिकारिता और शक्तियों के बारे में विधि
बनाने की अनन्य शक्ति है।
(3) संसद और पहली अनुसूची के भाग 1 में तत्समय
विनिर्दिष्ट राज्य के विधानमंडल को भी, जिसके संबंध
में या किसी क्षेत्र के संबंध में जिसके भीतर उच्च
न्यायालय अधिकारिता का प्रयोग करता है, ऐसे राज्य या
क्षेत्र के संबंध में, समवर्ती सूची में प्रगणित विषयों में से
किसी की बाबत ऐसे उच्च न्यायालय की अधिकारिता
और शक्तियों के बारे में विधि बनाने की शक्ति है।
(4) संसद को पहली अनुसूची में तत्समय विनिर्दिष्ट राज्य या
ऐसे राज्य के भीतर किसी क्षेत्र के संबंध में राज्य सूची
में प्रगणित विषयों में से किसी की बाबत उच्च न्यायालय
की अधिकारिता और शक्तियों के बारे में विधि बनाने की
शक्ति है।
सिविल और 222. संसद तथा पहली अनुसूची के भाग 1 में तत्समय दांडिक मामलों विनिर्दिष्ट राज्य के विधानमंडल को भी, जिसमें उच्च में उच्च न्यायालयों न्यायालय की प्रधान पीठ स्थित है, सिविल और दांडिक द्वारा अपनाई जाने मामलों में ऐसे उच्च न्यायालय द्वारा अपनाई जाने वाली वाली प्रक्रिया की प्रक्रिया की बाबत विधि बनाने की शक्ति है। बाबत विधायन
* . समिति के कुछ सदस्यों का विचार है कि अनुच्छेद 217 की दृष्टि से अनुच्छेद 218, 220, 221 और
222 आवश्यक नहीं है।