अध्याय 1 - वित्त - संघ और राज्यों के बीच राजस्वों का वितरण - Page 259

240 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

व्यावृत्ति 257. ऐसे कर, शुल्क, उपकर या फीसें, जो इस संविधान के

प्रारंभ से ठीक पहले किसी राज्य की सरकार द्वारा अथवा

किसी नगरपालिका या अन्य स्थानीय प्राधिकारी या

निकाय द्वारा उस राज्य, नगरपालिका या अन्य स्थानीय

प्राधिकारी या निकाय द्वारा उस राज्य, नगरपालिका, जिला

या अन्य स्थानीय क्षेत्र के प्रयोजनों के लिए विधिपूर्वक

उद्ग्रहीत की जा रही थीं, इस बात के होते हुए भी कि

वे कर, शुल्क, उपकर या फीसे संघ सूची में वर्णित हैं,

तब तक उद्ग्रहीत की जाती रहेंगी और उन्हीं प्रयोजनों के

लिए उपयोजित की जाती रहेंगी जब तक संसद विधि

द्वारा इसके प्रतिकूल उपबंध नहीं करती है।

करों और शुल्कों 258. (1) इस अध्याय के अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, संघ के उद्ग्रहण, इस अनुच्छेद के खंड (2) के उपबंधों के अधीन रहते संग्रहण और हुए, ऐसे राज्य में भारत सरकार द्वारा उद्ग्रहणीय किसी वितरण के संबंध कर या शुत्क के उद्ग्रहण और संग्रहण के संबंध में तथा में पहली अनुसूची इस अध्याय के उपबंधों में अन्यथा उसके आगमों के के भाग 3 में विनिर्दिष्ट वितरण के लिए, पहली अनुसूची के भाग 3 में तत्समय रियासतों के साथ करार विनिर्दिष्ट रियासत के साथ कोई करार कर सकता है और

जब इस प्रकार करार कर लिया जाए तो इस अध्याय के

उपबंध ऐसी रियासत के बारे में ऐसे करार के निबंधनों के

अधीन रहते हुए, प्रभावी होंगे।

(2) इस अनुच्छेद के खंड (1) के अधीन किया गया करार

इस संविधान के प्रारंभ से अधिक से अधिक 10 वर्ष तक

प्रवृत्त रहेगाः

परंतु राष्ट्रपति ऐसे प्रारंभ से 5 वर्ष बीतने पर किसी समय,

ऐसे करार को समाप्त कर सकेगा यदि वित्त आयोग की

रिपोर्ट पर विचार करने के बाद वह ऐसा करना आवश्यक

समझता है।

शुद्ध आगम 259. (1) इस अध्याय के पूर्वगामी उपबंधों में शुद्ध आगम से किसी आदि की गणना कर या शुल्क के संबंध में उसका वह आगम अभिप्रेत

है जो उसके संग्रहण के खर्चों को घटाकर आए और उन

उपबंधों के प्रयोजनों के लिए किसी क्षेत्र में या उससे