अध्याय 1 - वित्त - संघ और राज्यों के बीच राजस्वों का वितरण - Page 258

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राज्य द्वारा भारत सरकार के अनुमोदन से हाथ में लिया जाए।

वृत्तियों, व्यापारों, 256. (1) इस संविधान के अनुच्छेद 217 में किसी बात के होते हुए आजीविकाओं और भी किन्तु इस अनुच्छेद के खंड (2) और (3) के नियोजनों पर कर उपबंधों के अधीन रहते हुए किसी राज्य के विधानमंडल को राज्य, नगरपालिका जिला बोर्ड, स्थानीय बोर्ड और उनमें अन्य स्थानीय प्राधिकरण के फायदे के लिए वृत्तियों, व्यापारों, आजीविकाओं और नियोजनों पर कर के संबंध में विधियां बनाने की शक्ति होगी।

(2) राज्य को या उस राज्य में किसी एक नगरपालिका, जिला बोर्ड, स्थानीय बोर्ड या अन्य स्थानीय प्राधिकारी को किसी एक व्यक्ति के बारे में वृत्तियों, व्यापारों, आजीविकाओं और नियोजनों पर करों के रुप में संदेय कुल रकम दो सौ पचास रुपए प्रति वर्ष से अधिक नहीं होगीः

परंतु यदि इस संविधान के प्रारंभ से ठीक पूर्ववर्ती वित्तीय वर्ष में किसी राज्य या किसी ऐसी नगरपालिका, बोर्ड या प्राधिकारी की दशा में वृत्तियों, व्यापारों, आजीविकाओं या नियोजनों पर ऐसा कर प्रवृत्त था जिसकी दर या जिसकी अधिकतम दर दो सौ पचास रुपए प्रतिवर्ष से अधिक थी तो ऐसा कर तब तक उद्गृहीत होता रहेगा जब तक संसद विधि द्वारा इसके प्रतिकूल उपबंध नहीं करती है और संसद इस प्रकार बनाई गई कोई विधि साधारणतया या किन्हीं विनिर्दिष्टराज्यों, नगरपालिकाओं, बोर्डों या प्राधिकारियों के संबंध में बनाई जा सकेगी।

(3) वृत्तियों, व्यापारों, आजीविकाओं और नियोजनों पर करों के संबंध में पूर्वोक्त रुप से विधियां बनाने की राज्य के विधानमंडल की शक्ति का अर्थ नहीं लगाया जाएगा कि वह वृत्तियां, व्यापारों, आजीविकाओं और नियोजनों से प्रादभुत या उद्भूत आय पर करों के संबंध में विधियां बनाने की संसद की शक्ति को किसी प्रकार सीमित करती है।