अध्याय 1 - वित्त - संघ और राज्यों के बीच राजस्वों का वितरण - Page 261

242 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

(ख) भारत के राजस्व में से राज्यों के राजस्व में सहायता

अनुदान को शासित करने वाले सिद्धांतों के बारे में,

(ग) भारत सरकार द्वारा पहली अनुसूची के भाग 3 में तत्समय

विनिर्दिष्ट किसी रियासत में उद्ग्रहणीय किसी कर या

शुल्क के उद्ग्रहण, संग्रहण और वितरण की बाबत संघ

द्वारा ऐसे राज्य के साथ किए गए किसी करार के निबंधनों

की निरंतरता या उपरान्तरण के बारे में_ तथा

(घ) सुदृढ़ वित्त के हित में राष्ट्रपति द्वारा आयोग को निर्दिष्ट

किए गए किसी अन्य विषय के बारे में, राष्ट्रपति को

सिफारिश करे।

(4) आयोग अपनी प्रक्रिया अवधारित करेगा और अपने कृत्यों

के पालन में उसे ऐसी शक्तियां होंगी जो संसद, विधि

द्वारा, उसे प्रदान करे।

वित्त आयोग 261. राष्ट्रपति इस अध्याय के पूर्वगामी उपबंधों के अधीन की सिफारिशें वित्त आयोग द्वारा की गई प्रत्येक सिफारिश को, उस पर

की गई कार्रवाई के स्पष्टीकरण ज्ञापन सहित, संसद के

समक्ष रखा जाएगा।

प्रकीर्ण वित्तीय उपबंध

भारत के राजस्वों 262. संघ या राज्य किसी लोग प्रयोजन के लिए कोई अनुदान में से किए जाने इस बात के होते हुए भी दे सकेगा कि वह प्रयोजन ऐसा वाले व्यय नहीं है जिसके संबंध में, यथास्थिति, संसद या उस राज्य का विधानमंडल विधि बना सकता है।

लोक धन की 263. (1) राष्ट्रपति द्वारा या किसी राज्य के राज्यपाल द्वारा यह अभिरक्षा संबंधी सुनिश्चित करने के प्रयोजन के लिए नियम बनाये जा उपबंध सकेंगे यथास्थिति भारत के या किसी राज्य के राजस्व के

लेखे प्राप्त समस्त धनराशियां, ऐसे अपवादों के साथ, यदि

कोई है, जो नियमों में विनिर्दिष्ट किए जाएं।

भारत के या उस राज्य के लोग लेखा में संदत्त की

जाएंगी, और इस प्रकार बनाये गए नियम उन धनराशियों

के उक्त खाते में संदाय की बाबत उसमें से धन निकालने,

उसमें धन की अभिरक्षा तथा पूर्वोक्त विषय से संशक्त