अध्याय 1 - वित्त - संघ और राज्यों के बीच राजस्वों का वितरण - Page 262

243

अथवा आनुषंगिक किसी अन्य विषय के संबंध में

अपनाई जाने वाली प्रक्रिया विहित कर सकेंगे या किसी

व्यक्ति को विहित करने के लिए प्राधिकृत कर

सकेंगे।

(2) इस अनुच्छेद में किसी बात के होते हुए भी, संसद विधि

द्वारा भारत के राजस्व के लेखे प्राप्त धनराशियों की

अभिरक्षा, भारत के लोक लेखा में उनके सदस्य के लेखे

प्राप्त समस्त धनराशियों की अभिरक्षा, राज्य के लोग लेखा

में उनके संदाय, ऐसे लेखा से धन निकालने की विधि

द्वारा विनियमित कर सकेगा और इस अनुच्छेद के अधीन

बनाये गए कोई नियम ऐसी किसी विधि के उपबंधों के

अधीन रहते हुए प्रभावी होंगेः

कतिपय लोक 264. वहां तक के सिवाय, जहां तक संसद विधि द्वारा अन्यथा सम्पत्ति को उपबंध करे, किसी राज्य द्वारा या राज्य के भीतर किसी करों से छूट प्राधिकारी द्वारा अधिरोपित सभी करो से संघ की संपत्ति

को छूट होगी।

परंतु जब तक संसद विधि द्वारा अन्यथा उपबंध न करे,

जब तक संघ की किसी संपत्ति पर ऐसा कर जिसका

दायित्व इस संविधान के प्रारंभ से ठीक पहले ऐसी

संपत्ति पर था या माना जाता था, तब तक उसका दायित्व

बना रहेगा या उसका दायित्व माना जाता रहेगा जब तक

वह कर चलता रहता है।

विद्युत पर 265. वहां तक के सिवाय, जहां तक संसद विधि द्वारा अन्यथा करों से छूट उपबंध करे, किसी राज्य की कोई विधि (किसी सरकार

द्वारा या अन्य व्यक्तियों द्वारा उत्पादित) विद्युत के उपभोग

या विक्रय पर जिसकाः

(क) भारत सरकार द्वारा उपयोग किया जाता है या भारत

सरकार द्वारा उपयोग किए जाने के लिए उस सरकार को

विक्रय किया जाता है_ या

(ख) किसी रेल के निर्माण, उसे बनाए रखने या चलाने में भारत

सरकार या किसी रेल कंपनी द्वारा जो उस रेल को चलाती

है, उपयोग किया जाता है अथवा किसी रेल के निर्माण,