अध्याय - 3- संपत्ति, संविदाएं, दायित्व और वाद - Page 267

248 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

अध्याय-3

संपत्ति, संविदाएं, दायित्व और वाद

कुछ दशाओं में 270. इस संविधान के प्रारंभ से ही, समस्त सम्पत्तियों, आस्तियों आस्तियों और और दायित्वों के संबंध में भारत सरकार और पहली ट्टणों, अधिकारों अनुसूची के भाग 1 में तत्समय विनिर्दिष्ट प्रत्येक राज्य और दायित्वों को सरकार क्रमशः भारत डोमिनियन की सरकार तथा का उत्तराधिकार तत्स्थायी राज्यपालों के प्रांतों की उत्तराधिकारी होगी जो

इस संविधान के प्रारंभ से पूर्व पाकिस्तान डोमिनियन

अथवा पश्चिमी बंगाल, पूर्वी बंगाल, पश्चिमी पंजाब

और पूर्वी पंजाब के निर्माण के फलस्वरुप किए गए

अथवा किए जाने वाले समायोजन के अधीन होगा।

राजगामी या 271. इसमें इसके पश्चात्, यथा उपबंधित के अधीन रहते हुए व्ययगत या पहली अनुसूची के भाग 3 में तत्समय विनिर्दिष्ट रियासतों स्वामी विहीन के सिवाय भारत के राज्यक्षेत्र में कोई संपत्ति जो यदि होने से प्रोदभूत यह संविधान प्रवर्तित न होता तो राजगामी या व्ययगत द्वारा संपत्ति या साधिकार स्वामी के अभाव में स्वामी विहीन होने से

हिज मजेस्टी को प्रोद्भूत हुई होती, यदि वह संपत्ति

पहली अनुसूची में भाग 1 में तत्समय विनिर्दिष्ट किसी

राज्य में स्थित संपत्ति है तो, उस राज्य की सरकार के

प्रयोजनों के लिए ऐसे राज्य में निहित होगी, और किसी

अन्य दशा में, भारत सरकार के प्रयोजनों के लिए संघ में

निहित होगीः

परंतु कोई संपत्ति, जो उस तारीख को जब वह इस प्रकार

हित मजेस्टी को प्रोद्भूत हुई होती, भारत सरकार के या

पहली अनुसूची के भाग 1 में तत्समय विनिर्दिष्ट किसी

राज्य की सरकार के कब्जे या नियंत्रण में थी, तब यदि

वे सयोजन जिनके लिए वह उस समय प्रयुक्त या धारित

थी, संघ के थे इस प्रकार विनिर्दिष्ट राज्य के थे भारत

सरकार के प्रयोजनों के लिए संघ में अथवा उस राज्य की