अध्याय - 3- संपत्ति, संविदाएं, दायित्व और वाद - Page 268

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सरकार के प्रयोजनों के लिए वह उस राज्य में निहित होगी।

संपत्ति अर्जित 272. (1) संघ की और पहली अनुसूची के भाग 1 में तत्समय करने की शक्ति विनिर्दिष्ट प्रत्येक राज्य की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार, समुचित विधानमंडल के किसी अधिनियम के अधीन रहते हुए, यथास्थिति संघ या ऐसे राज्य के प्रयोजनों के लिए धारित किसी संपत्ति के अनुदान विक्रय, व्यपन या बंधक तक, तथा क्रमशः उन प्रयोजनों के लिए संपत्ति के क्रय या अर्जन तथा संविदाएं करने तक होगा।

(2) संघ के या पहली अनुसूची के भाग-1 में तत्समय विनिर्दिष्ट राज्य के प्रयोजनों के लिए अर्जित समस्त संपत्ति यथास्थिति संघ में या ऐसी किसी राज्य में निहित होगी।

संविदाएं 273. (1) संघ की या पहली अनुसूची के भाग 1 में तत्समय विनिर्दिष्ट राज्य की कार्यपालिका शक्ति का प्रयोग करते हुए की गई सभी संविदाएं, यथास्थिति, राष्ट्रपति द्वारा या उस राज्य के राज्यपाल द्वारा की गई कही जाएंगी और वे सभी संविदाएं और संपत्ति संबंधी हस्तांतरण पत्र, जो उस शक्ति का प्रयोग करते हुए किए जाएं, राष्ट्रपति या राज्यपाल की ओर से ऐसे व्यक्तियों द्वारा और रीति से निष्पादित किए जाएंगे जिसे वह निर्दिष्ट का प्राधिकृत करें।

(2) राष्ट्रपति या पहली अनुसूची के भाग 1 में तत्समय विनिर्दिष्ट किसी राज्य का राज्यपाल इस संविधान के प्रयोजनों के लिए या भारत सरकार के संबंध में इससे पूर्व प्रवृत्त किसी अधिनियति के प्रयोजनों के लिए की गई या निष्पादित की गई किसी संविदा या हस्तांतरण-पत्र के संबंध में वैयक्तिक रुप से दायी नही होगा या उनमें से किसी की और से ऐसी संविदा या हस्तांतरण-पत्र करने या निष्पादित करने वाला व्यक्ति उसके संबंध में वैयक्ति रुप से दायी नही होगा।