अध्याय 11 - लोक सेवा आयोग - Page 278

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(ग) संघ या किसी राज्य के आयोग का कोई अन्य सदस्य भारत सरकार के या किसी राज्य की सरकार के अधीन किसी अन्य नियुक्ति का, राज्य के कार्यों के संबंध में नियुक्ति की दशा में, उस राज्य के राज्यपाल और किसी अन्य किसी नियुक्ति के लिए राष्ट्रपति के अनुमोदन के बिना, पात्र नहीं होगा।

लोक सेवा 286. (1) संघ और राज्य लोक-सेवा आयोगों का यह कर्तव्य होगा आयोग के कृत्य कि वे क्रमशः संघ की सेवाओं और राज्य की सेवाओं में नियुक्तियों के लिए परीक्षाओं का संचालन करें।

(2) यदि संघ लोक सेवा आयोग से कोई दो या अधिक राज्य ऐसा करने का अनुरोध करते हैं तो उसका यह भी कर्तव्य होगा कि वह ऐसी किन्हीं सेवाओं के लिए, जिनके लिए विशेष अर्हताओं वाले अभ्यर्थी अपेक्षित हैं, संयुक्त भर्ती की स्कीमें बनाने और उनका प्रवर्तन करने में उन राज्यों की सहायता करें।

(3) अखिल भारतीय सेवाओं के संबंध में तथा संघ के कार्यकलाप से संबंधित अन्य सेवाओं और पदों के संबंध में भी राष्ट्रपति तथा राज्य के कार्यकलाप से संबंधित अन्य सेवाओं और पदों के संबंध में राज्यपाल उन विषयों को विनिर्दिष्ट करने वाले विनियम बना सकेगा जिनमें साधारणतया या किसी विशिष्ट वर्ग के मामले में या किन्हीं विशिष्ट परिस्थितियों में लोक सेवा आयोग से परामर्श किया जाना आवश्यक नहीं होगा किन्तु इस प्रकार बनाये गए विनियमों के तथा अगले खंड के उपबंधों के अधीन रहते हुए राज्य आयोग से निम्नलिखित विषयों पर परामर्श किया जाएगा-

(क) सिविल सेवाओं में और सिविल पदों के लिए भर्ती की पद्धतियों से संबंधित सभी विषयों पर,

(ख) सिविल सेवाओं और पदों पर नियुक्ति करने में तथा एक सेवा से दूसरी सेवा में प्रोन्नति और अंतरण करने में अनुसरण किए जाने वाले सिद्धांतों पर और ऐसी नियुक्ति, प्रोन्नति या अंतरण के लिए अभ्यार्थियों की उपयुक्तता