पांचवीं अनुसूची [अनुच्छेद 189 (क) और 190(1)] अनुसूचित क्षेत्रों और अनुसूचित जनजातियों के प्रशासन और नियंत्राण के बारे में उपबंध - Page 318

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जो अनुसूचित जनजाति का सदस्य नहीं है, अंतरित करना प्रतिषिद्ध किया

जा सके।

(3) इस पैरा के अधीन बनाये गये कोई विनियम जब राज्यपाल द्वारा प्रख्यापित

कर दिए जाएं, तो उनका वही बल और प्रभाव होगा जो समुचित

विधानमंडल के किसी अधिनियम का जो ऐसे क्षेत्र पर लागू हैं, होता है

तथा इस संविधान द्वारा इस विधानमंडल को प्रदत्त शक्तियों के फलस्वरुप

अधिनियम किया गया है।

भाग 5

अनुसूचित क्षेत्र

* 18. अनुसूचित क्षेत्रः

(1) निम्न सारणी के भाग 1 से 7 में विनिर्दिष्ट क्षेत्र संविधान के अर्थ में अनुसूचित

क्षेत्र होंगे, और उक्त सारणी में से किसी खंड, जिले, प्रशासनिक क्षेत्र, तहसील

या संपदा के प्रतिनिर्देश के रुप में किया जाएगा जो इस संविधान के आरंभ

की तारीख में विद्यमान है।

(2) राष्ट्रपति, किसी भी समय, आदेश द्वारा,

(क) निर्देश दे सकेगा कि किसी अनुसूचित क्षेत्र का संपूर्ण या कोई विनिर्दिष्ट

भाग अनुसूचित क्षेत्र या ऐसे क्षेत्र का भाग नहीं रहेगा।

(ख) किसी अनुसूचित क्षेत्र में प्रिवर्तन कर सकेगा किन्तु सीमाओं को ठीक

करके ही_

(ग) पहली अनुसूची के भाग 1 में तत्समय विनिर्दिष्ट किसी राज्य की

सीमाओं में कोई परिवर्तन करने पर अथवा उस अनुसूची के भाग 1

में संघ में ग्रहण किए गए या संसद द्वारा विधि द्वारा स्थापित किए

गए किसी नये राज्य के शामिल किये जाने पर किसी राज्यक्षेत्र को जो

इस प्रकार विनिर्दिष्ट किसी राज्य में पहले शामिल नहीं था, अनुसूचित

क्षेत्र या उसका भाग घोषित कर सकेगा_

* . समिति की राय है कि मूलरूप में अधिनियमित भारत शासन अधिनियम, 1935 की धारा 91(2) के अनुसार एक उपबंध इस पैरे में जोड़ा जाए ताकि कोई भी क्षेत्र अनुसूचित क्षेत्र से निकाला जा सके या उसमें शासित किया जा सके और समिति ने तदनुसार इस पैरे में उपपैरा (2) जोड़ा है।