301
जमींदारियां।
दुर्ग जिले की औंधी, कोरचा, पनवारस और अम्बागढ़, चौकी जमींदारियां।
बालाघाट जिले की बैहर तहसील।
अमरावती जिले का मेल्घाट तालुका।
बैंतूल जिले की भैंसदेही तहसील।
7. उड़ीसा
खोडमाला समेत गंजम अभिकरण दर्रा।
कारोपुट जिला।
छठी अनुसूची
[ अनुच्छेद 189 (ख) और 190 (2) ]
असम के जनजाति क्षेत्रों के प्रशासन के बारे में उपबंध
- स्वशासी जिले और स्वशासी प्रदेशः
(1) इस अनुसूची के पैरा 19 से संलग्न सारणी के भाग 1 की प्रत्येक मद जो तत्समय
इस भाग में शामिल की गई है, के जनजाति क्षेत्रों .............................का एक
स्वशासी जिला होगा।
(2) यदि किसी स्वशासकीय जिले में भिन्न-भिन्न अनुसूचित जनजातियां राज्यपाल,
लोग अधिसूचना द्वारा, ऐस क्षेत्र या क्षेत्रों का जिनमें वे बसे हुए हैं, स्वशासी
प्रदेशों में विभाजित कर सकेगा।
(3) राज्यपाल, लोक अधिसूचना द्वारा-
(क) उक्त सारणी के भाग 1 में किसी क्षेत्र को सम्मिलित कर सकेगा।
(ख) नया स्वशासी जिला बना सकेगा।
(ग) किसी स्वशासी जिले का क्षेत्र बढ़ा सकेगा।
(घ) उक्त सारणी के भाग 1 से किसी क्षेत्र को निकाल सकेगा।
(ड़) किसी स्वशासी जिले का क्षेत्र घटा सकेगा।
परंतु इस अनुसूची के पैरा 14 के उप पैरा (1) के अधीन नियुक्त आयोग की रिपोर्ट पर विचार करने के पश्चात् ही इस उप पैरा के खंड (ख) या खंड (ग) के अधीन राज्यपाल द्वारा कोई निर्देश पारित किया जाएगा अन्यथा नहीं।
साथ ही इस उपपैरे के खंड (घ) और (ड़) के अधीन राज्यपाल द्वारा तब तक कोई निर्देश नहीं दिया जाएगा जब तक कि उस आशय का संकल्प संबंधित स्वशासी