छठी अनुसूची [अनुच्छेद 189 (ख) और 190 (2)] - Page 321

302 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

जिले की जिला परिषद द्वारा पारित न कर दिया जाए।

  1. जिला परिषदों और प्रादेशिक परिषदों का गठनः

(1) प्रत्येक स्वशासी जिले के लिए एक जिला परिषद होगी उसमें कम से कम

बीस और अधिक से अधिक चालीस सदस्य होंगे जिनमें से कम से कम तीन

चौथाई प्रौढ़ मताधिकार के आधार पर निर्वाचित किए जाएंगे।

(2) प्रत्येक जिला परिषद् के निर्वाचन के लिए निर्वाचन-क्षेत्रों का सीमांकन इस

प्रकार किया जाएगा कि जहां तक संभव हो वे क्षेत्र जहां जिले की विभिन्न

अनुसूचित जनजातियां बसी हों तथा वे क्षेत्र जहां अन्य लोग बसे हों, यदि कोई

हैं, पृथक-पृथक निर्वाचन-क्षेत्र होंगेः

परंतु ऐसा कोई भी निर्वाचन-क्षेत्र नहीं होगा जिसकी कुल जनसंख्या 500 से कम

है।

(3) इस अनुसूची में जो पैरा 1 के उपपैरा (2) के अधीन स्वशासी प्रदेश के रुप

में गठित प्रत्येक क्षेत्र के लिए एक पृथक प्रादेशिक परिषद होगी।

(4) प्रत्येक जिला परिषद और प्रत्येक प्रादेशिक परिषद् क्रमशः (जिले का नाम)

की परिषद ‘‘और’’ (प्रदेश का नाम) की प्रादेशिक परिषद नाम की निगमित

निकाय होगी, उसका शाश्वत उत्तराधिकार होगा और उसकी सामान्य मुद्रा होगी

और उक्त नाम से वह वाद लाएगी और उस पर वाद लाया जाएगा।

(5) इस अनुसूची के उपबंधों के अधीन रहते हुए स्वशासित जिले का प्रशासन ऐसे

जिले की जिला परिषद में वहां तक निहित होगा जहां तक वह इस अनुसूची

के अधीन ऐसे जिले के भीतर किसी प्रादेशिक परिषद में निहित नहीं है और

स्वशासी प्रदेश का प्रशासन ऐसे प्रदेश की प्रादेशिक परिषद में निहित होगा।

(6) प्रादेशिक परिषद वाले स्वशासी जिले में प्रादेशिक परिषद के प्राधिकार के अधीन

क्षेत्रों के संबंध में जिला परिषद को, इस अनुसूची द्वारा ऐसे क्षेत्रों के संबंध

में प्रदत्त शक्तियों के अतिरिक्त केवल ऐसी शक्तियां होंगी जो उसे प्रादेशिक

परिषद द्वारा प्रत्यायोजित की जाए।

(7) राज्यपाल, संबंधित स्वशासी जिलों या प्रदेशों के भीतर विद्यमान जनजाति

परिषदों या अन्य प्रतिनिधि जनजाति संगठनों से परामर्श करके जिला परिषदों

और प्रादेशिक परिषदों के प्रथम गठन के लिए नियम बनाएगा और ऐसे नियमों

में निम्नलिखित के लिए उपबंध किए जाएंगे, अर्थात्ः