3. संघीय संविधान समिति की रिपोर्ट - Page 45

26 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

और प्रांत के विभाजन के बाद वह संविधान सभा के सदस्य नहीं रहे। मैं चिन्तातुर हूँ कि वह 14 जुलाई से प्रारंभ होने वाले संविधान सभा के अगले सत्र में भाग लें। अतः यह आवश्यक है कि वह तुरन्त निर्वाचित किए जाएँ।’’

तद्नुसार डॉ. अम्बेडकर संविधान सभा के सदस्य के रुप में जुलाई, 1947 में मुम्बई से पुनः निर्वाचित हुए। इसके बाद शीघ्र ही प्रधानमंत्री नेहरु ने उन्हें 15 अगस्त, 1947 को स्वाधीनता दिवस की पूर्व संध्या में गठित मंत्रिमंडल में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया। डॉ. अम्बेडकर ने आमंत्रण स्वीकार किया और भारत के प्रथम विधि मंत्री बने 29 अगस्त को सभा ने उन्हें मसौदा समिति का अध्यक्ष निर्वाचित किया, जिसे संविधान निर्माण का कार्य सौपा गया था। डॉ. अम्बेडकर जो अब तक कांग्रेस के पक्के विरोधी थे, संविधान के विषय में उनके मित्र, दार्शनिक तथा मार्गदर्शक बन गए-संपादक। ]

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