112 बाबा साहेब डा. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
# श्रीमान् नज़ीरुद ् दीन अहमद ः शायद यहाँ कोई मुद्रण-दोष है, मैं नही जानता। यदि यहाँ कोई मुद्रण-दोष नहीं है तो यह निश्चित रूप से टिप्पणी के लिए खुला है कि यह अस्पष्ट है।
एक मात्र प्रश्न जो मेरे मस्तिष्क में था वह सही कार्य विवरण द्वारा सर्वोच्च न्यायालय में कारवाई करने के अधिकार की गारंटी था। मैं लोगों को दूसरी अदालतों में भी कार्रवाई करने की अनुमति देना चाहता हूँ। यदि यहाँ एक मूलाधिकार अनुदत्त है और यदि कोई गरीब व्यक्ति सर्वोच्च न्यायालय में कार्रवाई करने के लिए मजबूर होता है ...............
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ः उपधारा (3) देखें।
श्रीमान् नज़ीरुद्दीन अहमदः वह उपधारा विशेष रूप से उल्लिखित कुछ अन्य अदालतों को ही इस विषय पर विचार करने की शक्ति देती है, लेकिन मैं इसे और सामान्य बनाना चाहता था, कि मूलाधिकार किसी भी अदालत में प्रावेदन द्वारा लागू किये जा सकते हैं..................
# सी.ए.डी., अंक VII, 9 दिसम्बर, 1948, पृ. 931