संविधान प्रारूप
अनुच्छेद 67-क
* माननीय सभापतिः अब हम लोग संविधान प्रारूप पर विचार करेंगे। सभा में अनुच्छेद 67 तक चर्चा हो चुकी है। अब हम लोग आगे बढ़ेंगे। संचालन समिति की यह राय थी कि हम लोग सबसे पहले चुनाव संबंधी मामलों से संबंधित अुनच्छेदों को स्वीकार कर सकते हैं। मेरे विचार से सभा की भी यही राय है लेकिन मैं समझता हूँ कि आज उन अनुच्छेदों पर कार्यवाही कर पाना संभव नहीं हो पाएगा और हम उन मामलों पर कल चर्चा कर सकते हैं। आज हम अनुच्छेद 67 और चुनाव मामलों से संबंधित अनुच्छेदों, जो कि आज की चर्चा में शामिल हैं, से शुरुआत कर सकते हैं और जो बच जाएंगे उन पर बाद में चर्चा होगी। एक अनुच्छेद के संशोधन के बारे में सूचना दी गई है और वह अनुच्छेद 67-क है। पहले उसे लिया जाए।
नया अनुच्छेद 67-क
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर (बॉम्बेः जनरल)ः सभापति महोदय, मैं प्रस्ताव करता हूँः
फ्कि अनुच्छेद 67 के बाद निम्नलिखित नया अनुच्छेद अन्तःस्थापित किया जाएः-
67-क
(1) राष्ट्रपति संसद के किसी भी सदन में पुनः स्थापित किए गए अथवा पुनः
स्थापित किए जाने वाले किसी भी विधेयक के संबंध मेंं संसद के सदनों
की सहायता करने तथा परामर्श देने हेतु किन्हीं व्यक्तियों जिनकी संख्या तीन
से अधिक नहीं हो, के नाम-निर्देशित कर सकता है।
(2) किसी विधेयक के संबंध में इस प्रकार नाम-निर्देशित व्यक्ति को उक्त
विधेयक के संदर्भ में किसी भी सदन और संसद के सदनों की संयुक्त
बैठक और संसद की किसी समिति जिसका सदस्य उसे नामित किया जाए,
में बोलने, कार्यवाहियों में बोलने तथा भाग लेने का अधिकार होगा लेकिन
ऐसे नाम-निर्देशन के परिणामस्वरूप उसे मतदान का अधिकार नहीं होगा
* ख्., सीएडी, आधिकारिक प्रतिवेदन, खण्ड VIII, दिनांक 18 मई, 1949, पृ. 82-83