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तथा किसी अन्य मामलों में उसे किसी भी सदन की कार्यवाहियों या सदनों
की संयुक्त बैठक में अथवा संसद की किसी समिति में न तो बोलने और
न ही भाग लेने का अधिकार होगा।य्
महोदय, इस अनुच्छेद को संविधान में अन्तःस्थापित किए जाने की जरूरत है। क्योंकिः सभा को याद होगा कि ऊपरी सदन की संरचना के बारे में मूलतः केन्द्रीय संविधान समिति के प्रतिवेदन के 14वें पैराग्राफ में उल्लेख किया गया था। उस पैराग्राफ में यह बताया गया था कि प्रारूप समिति को आयरिश प्रणाली, जिसके अन्तर्गत विभिन्न क्षेत्रों जैसे विज्ञान, साहित्य, कृषि, इंजीनियरिंग आदि से संबंधित व्यक्तियों के पैनल में से 15 सदस्यों को नामित किए जाने की व्यवस्था है, को अपने मॉडल के रूप में स्वीकार करना चाहिए। महोदय जब प्रारूप समिति ने इस मामले पर विचार किया, तो बी.एन. राव उसी समय यात्रा पर चले गए और उन्होंने श्री डी. वलेरा और आयरिश सरकार के अन्य सदस्यों के साथ इस बारे में चर्चा की थी कि आयरलैण्ड में यह प्रणाली अब तक कितनी सफल रही है और उन्हें यह बताया गया कि वह पैनल प्रणाली पूरी तरह से विफल हो चुकी है और इसिलए प्रारूप समिति ने केन्द्रीय संविधान समिति के प्रतिवेदन के पैरा 14 में सुझाए गए प्रावधान को छोड़ देने का निर्णय लिया और उसके स्थान पर एक सरल उपाय की व्यवस्था कर दी अर्थात् राष्ट्रपति को ऊपरी सदन में 15 सदस्यों, जिनके पास विज्ञान, साहित्य और समाज सेवाओं के बारे में विशेष ज्ञान या व्यावहारिक अनुभव हो, को नामित करने का प्राधिकार दे दिया गया। प्रारूप समिति द्वारा इस प्रारूप को तैयार कर लिए जाने के बाद केन्द्रीय संविधान समिति ने इस मामले पर फिर विचार किया और केन्द्रीय संविधान समिति के इस सत्र में समिति ने यह प्रस्ताव किया कि मूलतः कुल 15 व्यक्तियों को नामित किए जाने की जो व्यवस्था है, उसके अन्तर्गत उन व्यक्तियों को दो वर्गों में विभाजित कर दिया जाना चाहिए, अर्थात् एक समूह ऐसे व्यक्तियों को होना चाहिए, जो सभा के पूर्णकालिक सदस्य होंगे और उन लोगों के पास कला, विज्ञान, साहित्य और समाज सेवा के बारे में विशेष ज्ञान और व्यावहारिक अनुभव होना चाहिए और तीन व्यक्तियों को विशेषज्ञ के रूप में नामित किया जाना चाहिए, जो ससंद द्वारा किसी विशेष समय में विचार किए जा रहे किसी विशेष मामले के संबंध में किए जाने वाले उपाय के बारे में संसद को अपनी राय दे सकते हैं और उसकी सहायता कर सकते हैं।
केन्द्रीय समिति के दूसरे सत्र की सिफारिश के पहले भाग को अनुच्छेद 17 में पहले ही समाविष्ट किया जा चुका है, जिसे सभा पारित कर चुकी है। केन्द्रीय संविधान समिति की सिफारिश के दूसरे भाग को प्रभावी बनाने के लिए इस अनुच्छेद को संविधान में शामिल किए जाने का प्रस्ताव किया गया है। माननीय सदस्य इस पर गौर करेंगे कि यह अनुच्छेद इसके अन्तर्गत नामित सदस्यों के कार्यों को सीमित करता है। उनका कार्य किसी विशेष उपाय, जो सभा के विचाराधीन हो, के मामले में सभा की सहायता करना और उसे परामर्श देना है_ दूसरे शब्दों में अनुच्छेद 67-क के अधीन नामित किए गए