अनुच्छेद 273 - Page 213

194 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

इसके अतिरिक्त श्री त्यागी ने यह प्रश्न उठाया है कि यदि कोई व्यक्ति किसी संविदा पर हस्ताक्षर करता है तो वह उसके दायित्व से विमुक्त क्यों किया जाए। मेरे विचार से यदि श्री त्यागी को मंत्रिमंडल का सदस्य बना दिया जाता तो उनकी आपत्ति के बहुत अंश का निराकरण हो जाता। मैं उनसे यह पूछता हूँ कि यदि वे भारत सरकार की ओर से कोई संविदा करते तो उसका दायित्व क्या उन पर होता? मुझे विश्वास है कि वे साधारण वाणिज्य सम्बन्धी प्रक्रिया से परिचित हैं। एक प्रधान अपनी ओर से कुछ कार्य करने के लिए एक अभिकर्ता नियुक्त करता है। जब तक कि अभिकर्ता ने प्रधान द्वारा उसे दिए हुए प्राधिकार का उल्लंघन न किया हो, तब तक प्रधान के हितसाधन के लिए उसने जो भी संविदा की हो, उसका दायित्व व्यक्तिगत रूप से उस पर न होगा। यहाँ भी इसी सिद्धांत का अनुसरण किया गया है। मेरे माननीय मित्र श्री त्यागी को यह विदित नहीं है कि भारत सरकार में बहुत काल से इसी प्रथा का अनुसरण होता आया है कि किसी निश्चित प्रतिष्ठा के अधिकारी द्वारा जारी किसी दस्तावेज अथवा पत्र द्वारा ही भारत सरकार वचनबद्ध होती है। किसी अन्य अधिकारी द्वारा जारी किया हुआ दस्तावेज अथवा पत्र भारत सरकार के लिए बन्धनकारी नहीं होता। इसलिए इसे नियमों में स्पष्ट शब्दों में कहने की आवश्यकता होती है कि उप सचिव को, अथवा संयुक्त सचिव को अथवा अपर सचिव को अथवा केवल सचिव को ही भारत सरकार को वचनबद्ध करने की शक्ति प्राप्त होगी। इसलिए यह मेरी समझ में नहीं आता कि जो व्यक्ति भारत सराकर की ओर से केवल हस्ताक्षर कर रहा हो, उस पर व्यक्तिगत रूप से दायित्व क्यों हो, क्योंकि यह भारत सरकार के प्राधिकार से अथवा उसके अन्तर्गत कार्य करेगा, यदि भारत सरकर किसी आदान-प्रदान के लिए स्वीकृति देती है, किंतु विधानमंडल उस पर आपत्ति करता है और यह समझता है कि वह अनावश्यक है अथवा हानिकारक है अथवा कार्यपालिका सरकार को संसद द्वारा प्रदत्त विधायी प्राधिकार के अन्तर्गत नहीं है, तो यह मामला सरकार और संसद के आपस में तय करने का है। संसद या तो सरकार को पदच्युत कर सकती है या संविदा का शून्यन कर सकती है या जो भी चाहे कर सकती है। किन्तु यह मेरी समझ में नहीं आता कि किसी ऐसे व्यक्ति को, जो अन्य पक्ष को केवल यह विश्वास दिलाने के लिए नियुक्त किया गया हो कि वह भारत सरकार की ओर से हस्ताक्षर कर रहा है, किसी प्रकार उत्तरदायी ठहराया जा सकता है। मेरे मित्र श्री त्यागी की आपत्ति में कोई सार नहीं है।

माननीय सभापतिः अब मैं इन विभिन्न संशोधनों पर मत लेता हूँ।

¹डॉ. अम्बेडकर के तीनों संशोधन स्वीकृत हुए। अनुच्छेद 273 संशोधित रूप में संविधान में जोड़ा गयाह्