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अनुच्छेद 273

माननीय सभापतिः अब अनुच्छेद 273 को लेते हैं। डॉ. अम्बेडकर।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः श्रीमान्, मैं यह प्रस्ताव उपस्थित करता हूँः

फ्कि अनुच्छेद 273 के खण्ड (1) में फ्भाग 1य् शब्द और अंक के बाद फ्अथवा भाग 3य् शब्द और अंक प्रविष्ट किए जाएँ।

उपरोक्त संशोधन संख्या 201 के सम्बन्ध में अनुच्छेद 273 के खण्ड (1) में जिन दो स्थानो पर ‘राज्यपाल’ शब्द आया है, वहां ‘अथवा राज्यप्रमुख’ शब्द प्रविष्ट किए जाएँ।

उपरोक्त संशोधन संख्या 201 के सम्बंध में अनुच्छेद 273 के खण्ड (2) में ‘‘राज्य के राज्यपाल’’ शब्दों के स्थान पर ‘‘राज्यपाल अथवा राज्यप्रमुख’’ शब्द प्रविष्टि किये जायें।’’

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माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः श्रीमान्, मेरे माननीय मित्र श्री कामत फ्हस्तान्तरण-पत्रोंय् के सम्बन्ध में कुछ कह रहे थे और मेरे विचार से इनका तर्क यह था कि हम एक स्थान पर ‘संविदा’ शब्द प्रयोग कर रहे हैं और दूसरे स्थान पर ‘हस्तान्तरण-पत्र’। ‘हस्तान्तरण-पत्र’ बहुत पुरानी पदावली है और वह सभी प्रकार के हस्तान्तरण के अर्थ में प्रयोग किया जाता रहा है। इसलिए ‘हस्तान्तरण-पत्र’ शब्द में ‘संविदा’ शब्द का आशय सम्मिलित है। इसलिए यदि ये दोनों शब्द भी प्रयोग किए जाएँ तो कोई कठिनाई नहीं होगी, क्योंकि सम्पत्ति के हस्तान्तरण के सम्बन्ध में हस्तान्तरण-पत्र का अर्थ संविदा ही है।

श्री एच.वी. कामतः मैंने भाषा के सम्बन्ध में आपत्ति की थी। अनुच्छेद के आरम्भ में फ्सब संविदाएंय् शब्द आए हैं और बाद को फ्वे सब संविदाएं और सम्पत्ति सम्बन्धी हस्तान्तरण-पत्रय् आदि शब्द आए हैं।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः यदि भाषा के सम्बन्ध में कोई कठिनाई होगी, तो उस पर मसौदा-समिति विचार करेगी। मैं यह बता रहा था कि विधि की दृष्टि से हस्तान्तरण-पत्र और संविदा में क्या अन्तर है।

* ख्., सीएडी, खण्ड VIII, दिनांक 15 जून, 1949, पृ. 893

+ पूर्वोक्त, 895

++ पूर्वोक्त, पृष्ठ 895

# पूर्वोक्त पृष्ठ 898-99