अनुच्छेद 274 - Page 215

196 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

(2) फ्प्रांतय् शब्दों के बाद फ्अथवा देशी राज्यय् शब्द प्रविष्ट किए जाएँ।य्

श्री जसपतराय कपूर (संयुक्त प्रान्तः जनरल)ः मैं अपने संशोधन संख्या 2981 और संशोधन संख्या 2984 को उपस्थित नहीं कर रहा हूँ। किन्तु यदि उचित समझा जाए तो उन्हें मसौदा-समिति के सामने उनके विचारार्थ रखे जाएँ।

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माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः श्रीमान् उचित यह होगा कि मैं सभा के सम्मुख इस अनुच्छेद को उस रूप में पढ़ कर सुनाऊँ जैसा कि यह मेरे विभिन्न संशोधनों को समाविष्ट करने से हो जाएगा। अनुच्छेद इस प्रकार हो जाएगा।

फ्भारत संघ के नाम से, भारत सरकार व्यवहार-वाद ला सकेगी अथवा उसके विरुद्ध व्यवहार-वाद लाया जा सकेगा तथा इस समय प्रथम अनुसूची के भाग 1 अथवा भाग 2 में उल्लिखित किसी राज्य के नाम से, उस राज्य की सरकार व्यवहार-वाद ला सकेगी अथवा उसके विरुद्ध व्यवहार-वाद लाया जा सकेगा, तथा इस संविधान द्वारा दी गई शक्तियों के आधार पर, संसद द्वारा ऐसे राज्य के विधानमंडल द्वारा, जो अधिनियम बनाया जाए, उसके उपबंधों के अधीन रहते हुए वे अपने-अपने कार्यों के बारे में उसी प्रकार व्यवहार-वाद ला सकेंगे, अथवा उनके विरुद्ध उसी प्रकार व्यवहार-वाद लाया जा सकेगा, जिस प्रकार भारत अधिराज्य और तत्स्थानी प्रान्त अथवा तत्स्थानी देशी राज्य व्यवहार-वाद ला सकते अथवा उनके विरुद्ध व्यवहार-वाद लाया जा सकता, यदि इस संविधान को अधिनियम का रूप न दिया गया होता।य्

(2) यदि इस संविधान के प्रारम्भ पर -

(क) कोई ऐसी विधि कार्यवाहियाँ लम्बित हैं जिसमें भारत अधिराज्य एक

पक्ष है, तो उन कार्यवाहियों में उक्त अधिराज्य के स्थान में भारत संघ

समझा जाएगा, तथा

(यह एक नई बात है -)

(ख) कोई ऐसी विधि-कार्यवाहियाँ लम्बित हैं, जिनमें कोई प्रान्त या कोई

देशी राज्य एक पक्ष है, तो उन कार्यवाहियों में उस प्रान्त या देशी राज्य

के स्थान में तत्स्थानी राज्य समझा जाएगा।

यह स्पष्ट है कि इस अनुच्छेद में यह निर्धारित किया गया है कि व्यवहार-वाद और कार्यवाहियाँ किस प्रकार आरम्भ की जाएंगी, इसका और कोई महत्त्व नहीं है। आरम्भ में ये शब्द थे कि भारत सरकार के नाम से व्यवहार-वाद लाया जाएगा। यह स्पष्ट है कि भारत सरकार अर्थात् कार्यपालिका सरकार एक अस्थायी निकाय होगी। एक समय जो सरकार पदारूढ़ होगी वह आगे चलकर लुप्त हो जाएगी और कुछ अन्य लोग आएंगे