144 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
लिया है कि अल्पसंख्यक केवल अनुसूचित जातियाँ तथा अनुसूचित जनजातियाँ हैं तो प्रारूपण समिति स्पष्टतः सदन के फैसले से और ऐसे फैसले के अनुसार अनुच्छेद को बदलने के लिए आबद्ध है।
माननीय सभापति : यहाँ व्यवस्था का प्रश्न है कि अल्पसंख्यकों से संबंधित अनुच्छेद पर दुबारा विचार करते समय जो फैसला हुआ था, वह स्थानों के आरक्षण के बारे में है और नौकरियों के प्रश्न पर विचार नहीं हुआ था और यह प्रश्न तय नहीं हुआ था।
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : जैसा मैं इसे समझता हूँ, फैसला यह था कि
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वे अल्पसंख्यक नहीं हैं और इसीलिए वे इन दोनों में से कोई भी विशेषाधिकार को पाने वाले नहीं हैं।
अनुच्छेद 299
* माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : श्रीमान, मैं पेश करने की अनुमति चाहता हूॅ :
“कि अनुच्छेद 299 के स्थान पर निम्नलिखित अनुच्छेद रखा जाए :
अल्पसंख्यकों के लिए विशेष अधिकारी “299. (1) अल्पसंख्यकों के लिए एक विशेष अधिकारी होगा जिसे राष्ट्रपति नियुक्त करेगा। अल्पसंख्यकों के लिए
विशेष अधिकारी
(2) इस संविधान के अधीन अल्पसंख्यकों के लिए उपबन्धित
रक्षोपायों से सम्बद्ध सब विषयों की जांच करना तथा उन पर कार्यवाही होने के सम्बन्ध में जैसे राष्ट्रपति द्वारा निर्दिष्ट अन्तरालों पर राष्ट्रपति को प्रतिवेदन देना विशेष पदाधिकारी का कर्त्तव्य होगा तथा राष्ट्रपति ऐसे सब प्रतिवेदनों को संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष रखेगा।“
मूल अनुच्छेद में उपबन्धित था कि केन्द्र और प्रत्येक प्रदेश दोनों में एक-एक अल्पसंख्यक अधिकारी होना चाहिए। अब यह महसूस किया गया है कि अल्पसंख्यकों की संख्या अत्यंत घट गई है, इस प्रकार के बोझिल उपबन्ध प्रत्येक राज्य में वांछनीय नहीं है। मूल अनुच्छेद का उद्देश्य पूरा हो जायेगा यदि केन्द्र एक अधिकारी नियुक्त करता है और उसे राष्ट्रपति को प्रतिवेदन करने के लिए कहता है।
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* ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 26 अगस्त, 1949, पृ. 703