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दशाओं में संसद की घोषणा आवश्यक होगी। प्रविष्टि 5 का क्षेत्र प्रविष्टि 64 से कहीं विस्तृत है। विभिन्न लक्ष्यों और उद्देश्यों को ध्यान में रखकर प्रविष्टि 5 को प्रविष्टि 64 से भिन्न करना इप्सित है।
(प्रविष्टि 5 संघ सूची में जोड़ी गई।)
प्रविष्टि 6
(प्रविष्टि 6 संघ सूची में जोड़ी गई।)
प्रविष्टि 7
“कि प्रथम सूची की प्रविष्टि 7 के स्थान पर निम्नलिखित प्रविष्टि रखी जाए :
’7. ‘‘छावनी क्षेत्रों का परिसीमन, ऐसे क्षेत्रों में स्थानीय स्वायत्त शासन, छावनी प्राधिकरणों का ऐसे क्षेत्रों में गठन और शक्तियां और (किराया नियंत्रण सहित) ऐसे क्षेत्रों में आवास स्थान।
यहाँ एक संशोधन मेरे मित्र श्री टी. टी. कृष्णमाचारी के नाम पर है जिसका प्रभाव ’स्थानीय स्वशासन’ पद में से ’स्व’ शब्द को हटाना मात्र है। जिससे इसे ’स्थानीय शासन’ पढ़ा जाए।“
श्री महावीर त्यागी : श्रीमन, क्या मैं सुझाव हूँ कि प्रविष्टि को छोड़ दिया जाए।
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः क्यों? मैं नहीं समझता। यदि आप कोई टिप्पणी करना चाहते हैं, तो हम सुनने के लिए और आपको उत्तर देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
श्री महावीर त्यागी : मैं महसूस करता हूँ कि या तो हमारे संशोधन और मामले संसद पटल पर रखने-पूर्ण अवसर दिये जाएं अथवा ऐसे अनुच्छेद, जो विवादास्पद हैं, हटाने के आदेश दिए जाए।
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : वह संशोधन श्री सिधवा के नाम पर 26 जनवरी से है। मेरे मित्र स्थिति से अब अवगत हुए हैं। उनके पास संशोधन देने के
* ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 29 अगस्त, 1949, पृ. 735