156 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
है-जलसेना, थलसेना, और वायुसेना, संघ को सभी शक्तियां देने के लिए बहुत काफी होंगी जो थलसेना, जलसेना, और वायुसेना को बनाये रखने के उद्देश्य के लिए आवश्यक हैं।
* माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : ‘संघ के कोई अन्य बल’ शब्दों को बनाये
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रखना आवश्यक है क्योंकि स्थायी सेना के अतिरिक्त यहाँ कुछ अन्य बल भी है जो सशस्त्र बलों में आते हैं जिन्हें केन्द्र रखता है। उदाहरण के लिए, “असम राइफल्स“ है जो सीमा सुरक्षा के लिए है। केन्द्र द्वारा संरक्षित कुछ पुलिस बल भी हैं जो भारत के राज्यों के बारे में हैं। इसलिए उनको कानूनी आधार देने के लिए उनको प्रविष्टि 4 में सम्मिलित करना वांछनीय है। मुझे इसका उल्लेख करना होगा कि उनको भारत सरकार अधिनियम, 1935 में प्रविष्टि I में जलसेना, थलसेना, और वायुसेना, से भिन्न रूप में मान्यता प्राप्त है।
माननीय सभापति : मैं सदन के सामने सरदार हुक्मसिंह के संशोधन को रखता हूँ।
(संशोधन अस्वीकार किया गया।)
माननीय सभापति : मैं डॉ. अम्बेडकर द्वारा पेश की गई प्रविष्टि रखता हूँ।
(संशोधन स्वीकार किया गया।)
[ यथासंशोधित प्रविष्टि 4 संघ सूची में जोड़ी गई। ]
संघ सूची
प्रविष्टि 5
** माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : श्रीमन, प्रविष्टि संख्या 5 प्रविष्टि संख्या 64
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के साथ पढ़ी जाए प्रतिविष्टि संख्या 64 व्यवसाय नियंत्रण के बारे में है जिसे संसद ने लोगों के हित में आवश्यक घोषित किया है। यह प्रविष्टि संख्या 5 का संबंध प्रतिरक्षा प्रयोजन के लिए उद्योगों के प्रबंध ग्रहण अथवा युद्ध के लिए अभियोजन है। यही महत्वपूर्ण अंतर था। मैं सोचता हूँ कि यदि प्रविष्टि 5 को प्रविष्टि 64 के सदृश बना दिया जाए तो यह युद्ध प्रयास को काफी सीमा तक बाधित करेगी। दोनों
* ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 29 अगस्त, 1949, पृ. 732
* ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 29 अगस्त, 1949, पृ. 733