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स्पष्टीकरण : इस प्रविष्टि में व्यवसायों, व्यापार, जीवनवृत्ति और रोजगार से उद्गृहीत अथवा उपजी आय पर करों के संबंध में संघ के प्राधिकार को किसी भी रूप में सीमांकन नहीं माना जाएगा।
“टिप्पण आय कर के परिणाम से अथवा व्यवसाय, व्यापार, और रोजगार“
* * * *
* माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : श्रीमन, मैं समझता हूँ कि यह संशोधन भ्रांतधारणा पर आधारित है। यह प्रविष्टि शुद्ध रूप से प्रादेशिक प्रविष्टि है। आयकर लगाने के लिए यह केन्द्र की शक्तियों को सीमित नहीं करती। दूसरी ओर यह 56 प्रविष्टि केन्द्र द्वारा लगाये जाने वाले आयकर पर अनाधिकार होगा। श्रीमान, आप यह याद करें मैंने अनुच्छेद 256 में यह कहने के लिए संशोधन पेश किया था कि स्थानीय संस्थाओं द्वारा लगाया गया कोई कर आयकर नहीं होगा। यह संशोधन आवश्यक नहीं है।
प्रो. शिब्बनलाल सक्सेना : श्रीमान, मैं संशोधन के लिए दबाव नहीं डालता।
(संशोधन सदन की इजाजत से वापिस ले लिया गया। प्रविष्टि 56 राज्य सूची में जोड़ी गई।)
प्रविष्टि 58
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : श्रीमान, मेरा प्रस्ताव है-
“कि सूची II की प्रविष्टि 58 के स्थान पर निम्नलिखित प्रविष्टि रखी जाए -
“समान की विक्री अथवा क्रम पर कर।
58-क विज्ञापन पर कर“
कुल आवर्त्त शब्द को दूर करने का प्रयत्न कर रहा हूँ।
* * * *
| ke | kU; |
|---|
श्री वी. एल. मुनीस्वामी पिल्लई (मद्रास : सामान्य) : मेरा प्रस्ताव है कि
“संशोधन की सूची के संशोधन संख्या 3638 के संदर्भ में सूची II की प्रविष्टि 58 में
* ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 2 सितम्बर, 1949, पृ. 923
** ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 2 सितम्बर, 1949, पृ. 923
*** ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 2 सितम्बर, 1949, पृ. 923