238 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
नई प्रविष्टि 26-ख
* माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : श्रीमान क्या मैं स्पष्टीकरण दूँ।
सूची में प्रविष्टि के बारे में कुछ भ्रम और गलत धारणा प्रतीत होती है। मेरे मित्र श्री देशमुख के संशोधन के बारे में वह ग्रामीण श्रमिक, किसान और हर प्रकार के
खेती करने वालों का कल्याण चाहते हैं। अच्छा, मैं किसी प्रकार का स्पष्ट विचार इन सड़क वाहन के शब्द “ सभी प्रकार के खेतिहर“ साधन का रखना चाहूँगा। क्या वे चाहते हैं कि राज्य जमीदारों का कल्याण करे जो पांच लाख का राजस्व भुगतान करते हैं?
श्री आर. के. सिधवा : आप उन शब्दों को छोड़ सकते हैं।
** माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : यह मालगुजारों को भी सम्मिलित करेगा। किसी प्रविष्टि को स्वीकार करने से पूर्व मेरे दिमाग में स्पष्ट एवं सहमत होने वाले विचार होने चाहिए कि शब्दों का अर्थ क्या है? “खेतिहर“ शब्द का संक्षिप्त अर्थ नहीं होता। इसका अर्थ होना चाहिए अधिक लगान देने वाला। इसका अर्थ होना चाहिए ऐसा व्यक्ति जिसके पास दो एकड़ भूमि है। इसका यह भी अर्थ होना चाहिए ऐसा व्यक्ति जिसके पास पांच हजार एकड़ भूमि अथवा पांच लाख एकड़ भूमि हो।
डॉ. पी. एस. देशमुख : मैं उस विशेष पद को छोड़ने के लिए तैयार हूँ।
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : यह पहली कठिनाई है जो मेरे सामने आई है। दूसरा बिन्दु मुद्दा है कि मेरे मित्र डॉ. देशमुख विभिन्न प्रविष्टियों पर अधिक ध्यान नहीं देते उनका अर्थ क्या है? जहाँ तक कृषि का सम्बन्ध है, हमारे पास सूची II में दो स्पष्ट प्रविष्टियां हैं - संख्या 21 जो कृषि है और संख्या 24 जो भूमि है। यदि उन्होंने इन दो प्रविष्टियों को देखा होता तो उन्हें पता चलता ........ [***] ’’
डॉ. पी. एस. देशमुख : कैसे गलत तर्क दिए जा रहे हैं? उस व्यावसायिक प्रशिक्षण के लिए पृथक उपबन्ध चाहते हैं? गलत तर्क न दीजिए।
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : प्रशासन की गलतियों के लिए प्रश्नों के उत्तर देना मेरा कार्य नहीं है। जो प्रविष्टि का अर्थ है वहीं मैं बता रहा हूँ। जैसा मैंने कहा हमारे पास सूची II में दो प्रविष्टियां हैं। खेती के लिए “ कृषि शिक्षा और अन्वेषण, जंगली जानवरों से बचाव और पौधों की बीमारियों से बचाव।“ सहित खेती के लिए प्रविष्टि 21 है।
* ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 3 सितम्बर, 1949, पृ. 944
** ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 3 सितम्बर, 1949, पृ. 944-46
*** बिन्दु असल में गडबड़ी दर्शाते हैं।