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’माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : श्रीमन, स्थिति यह है : यदि कोई ’भारत’ शब्द से बंद हो जाता था तो इसका अर्थ वही है जो साधारणतया ’विदेशी राज्य’ का है। प्रत्येक राज्य दूसरे राज्य के लिए विदेशी राज्य है। परिभाषा के प्रथम भाग से यह बिल्कुल स्पष्ट है। इसलिए परिभाषा के उस भाग से कोई झगड़ा नहीं हो सकता। वास्तव में वह परिभाषा अनावश्यक भी नहीं हो सकती, लेकिन इस तथ्य की दृष्टि से कि हमने संविधान के कुछ भाग में शब्द ’विदेशी राज्य’ शब्द का प्रयोग किया है और इस तथ्य की दृष्टि से कि यह कुछ उद्देश्यों की घोषणा करने के लिए आवश्यक भी हो सकता है कि विदेशी राज्य शब्द शब्दावली के अर्थ में शब्दों के विदेशी राज्य है। कुछ प्रयोजनों के लिए विदेशी राज्य नहीं है। इस परिभाषा को रखना आवश्यक है और उसकी घोषणा की राष्ट्रपति को शक्ति देना आवश्यक है कुछ उन प्रयोजनों के लिए इस प्रकार का राज्य विदेशी राज्य नहीं होगा। मैं समझता हूँ कि मलाया का मामला पूरी तरह मुद्दा है। इसलिए इसका वस्तुतः अर्थ है कि कुछ प्रयोजनों के लिए राष्ट्रपति उसे घोषित करे यद्यपि राज्य उस दृष्टि से विदेशी राज्य है कि यह भारत के बाहर है कुछ प्रयोजनों के लिए विदेशी राज्य नहीं माना जाएगा। इसी प्रयोजन के लिए इस परिभाषा को समाविष्ट करने की माँग की गई है।
आदरणीय श्री के. सन्थानम : यह उपखंड कुछ प्रयोजनों के लिए अधिसूचना
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जारी करने का अधिकार राष्ट्रपति को नहीं देता। यह एक परिभाषा देता है।
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : जब राष्ट्रपति अधिसूचना जारी करेगा तो
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निःसंदेह वह सम्भवतः इसे याद रखेगा।
“डॉ. अम्बेडकर का संशोधन जैसा ऊपर दिखाया गया है स्वीकार किया गया।“