364 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
ऐसे अधिनियम जैसे ’मर्चेंट शिपिंग एक्ट रखे जाने चाहिए जब तक संसद अन्यथा व्यवस्था नहीं करती।
श्री एच.वी. कामथ : इस (झ) के बारे में प्रत्यक्षतः एक कमी है। यह विधियों और उपविधियों की बात करता है। लेकिन केवल ’नियम’ की बात की जाती है ’उपनियम’ की नहीं?
आदरणीय श्री के. सन्थानम : इसके लिए मेरे पास एक संशोधन है।
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : क्या कानून लागू हो रहा है अथवा नहीं हो
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रहा है। बहुत सी बातों पर निर्भर करता है। सर्वप्रथम विलोप से अपने आप व्यवस्था हो सकती है कि कतिपय विधियां प्रवृत्त नहीं होगी। हो सकता है कि बम्बई सरकार उस राज्यक्षेत्र के विलय के पश्चात् उस विशेष क्षेत्र के लिए जो बड़ौदा के नाम से जाना जाता है कानून को प्रतिधारित करे अथवा उसके अपने कानून द्वारा उसे न्यून करे। इसलिए किसी मौजूद विधि का अर्थ है ऐसी विधि जो संविधान के प्रारंभ के तारीख को प्रवृत्त है।
आदरणीय श्री के. सन्थानम : मैं अपने संशोधन पर दबाव नहीं डालता।
[ डॉ. अम्बेडकर का उपरोक्त संशोधन स्वीकार हुआ। खंड (1) का उपखंड (1) संशोधित रूप में अनुच्छेद 303 में जोड़ा गया। ]
माननीय सभापति : इसके बाद (ञ) इसके लिए कोई संशोधन नहीं है। प्रश्न है :
“कि खंड (1) का उपखंड (ञ) अनुच्छेद 303 का भाग है।“
(प्रस्ताव स्वीकार हुआ।)
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“कि अनुच्छेद 303 के खंड (1) के उपखंड (ञ) के पश्चात् निम्नलिखित उपखंड रखें :
( ii ) ’विदेशी राज्य’ का अर्थ है भारत से भिन्न कोई राज्य किंतु राष्ट्रपति द्व ारा इस निमित्त अधिसूचित राज्य सम्मिलित नहीं है।
आदरणीय श्री के. सन्थानम : क्या डॉ. अम्बेडकर कृपया बताएंगे कि उपखंड ( ञञ ) के बाद वाले भाग का क्या अर्थ है। क्या वह इसका एक दष्ष्टांत भी देंगे?
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* ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 16 सितम्बर, 1949, पृ. 1586