स्थानीय बोर्ड अधिनियम-संशोधन विधेयक
131
अल्पसंख्यकों के लिए सीटों के प्रश्न को कार्यपालिका की इच्छा पर छोड़ दिया है? क्या उसने निर्वाचन-क्षेत्रों को विभाजित करने के प्रश्न को कार्यपालिका की इच्छा पर छोड़ दिया है? क्या उसने मतदान के तरीकों से संबंधित प्रश्न को कार्यकारिणी की इच्छा पर छोड़ दिया है? ऐसा कुछ नहीं है। यह सब कुछ परिषद के आदेशों से किया गया है और ये आदेश उसी तरह भारत सरकार अधिनियम का भाग हैं, जिस तरह भारत सरकार का अधिनियम स्वयं है। इसलिए संविधान के अनुरूप ही हमें कार्य करने की जरूरत है। इस विधेयक के विषय में यह मेरा पहला निवेदन है।
जहां तक अन्य विषयों का संबंध है, मैं विधेयक के प्रभारी माननीय मंत्री महोदय से सबसे पहले जो बात जानना चाहता हूं, वह यह है कि उन्होंने उद्देश्य व कारणों के विवरण में बहुत ही उदारता से कहा है कि विभिन्न अल्पसंख्यकों को सीटें प्रदान करने के लिए वह जिन सिद्धांतों का पालन करना चाहते हैं, वे सिद्धांत जनसंख्या पर आधारित हैं। मैं इसके लिए उनका आभारी हूं। पर मैं उनसे पूछना चाहता हूं कि अगर यही वह सिद्धांत है, जिसके आधार पर वह विभिन्न अल्पसंख्यकों को सीटें प्रदान करना चाहते हैं, तो वह इस सिद्धांत को धारा में ही सम्मिलित क्यों नहीं करते हैं? उद्देश्य व कारणों के विवरण में दिए गए सिद्धांतों का हमें लाभ मिल सकेगा, इसकी क्या गारंटी है? हमें भिक्षादान नहीं चाहिए। हमें चाहिए अपने अधिकार, जिन्हें हम कार्यपालिका की इच्छा पर नहीं छोड़ना चाहते। हम चाहते हैं कि इसका निश्चित रूप से निर्धारण कानून के द्वारा हो। व्यावहारिक दृष्टि से जिस दूसरी बात से हमारा संबंध है, वह निर्वाचन-क्षेत्र की व्यवस्था का प्रश्न है। मुझे अपने माननीय मित्र की ज्यादा फिक्र है, जो एक विधायक की हैसियत से सदन में आ नहीं सके। मैं जानना चाहता हूं कि इन निकायों के बनाने के लिए किस तरह निर्वाचन-क्षेत्र की व्यवस्था की गई है। यह क्या एकल सदस्य निर्वाचन-क्षेत्र होगा या बहुसदस्यीय? उद्देश्य व कारणों के विवरण में भी कुछ नहीं बताया गया है। ऐसा क्यों है? अगर कार्यपालिका यह चाहती है कि अब से वे एकल सदस्य निर्वाचन-क्षेत्र की व्यवस्था को अपनाएंगे, तो हमें इस बात का पता होना चाहिए, क्योंकि यही इस बात का निर्णय करेगा कि हमें विधेयक का समर्थन करना है या विरोध। ऐसा नहीं किया गया है।
तीसरा मुद्दा जिसके बारे में मैं सबसे ज्यादा चिंतित हूं, वह है मतदान-प्रणाली का प्रश्न। क्या मतदान-प्रणाली निश्चित होगी या वह विभाजनात्मक प्रणाली होगी? यह बात भी स्पष्ट नहीं है। मैं चाहता हूं कि सदन में यह सब विषय स्पष्ट व निश्चित हो जाएं। मैं आशा करता हूं कि माननीय मंत्री महोदय मेरी समस्त शंकाओं का निवारण करेंगे और जिन सिद्धांतों का मैंने जिक्र किया है, उन्हें विधेयक में सम्मिलित करेंगे, ताकि हम जान सकें कि हमारे अधिकार क्या हैं? इस विधेयक में निहित सब कुछ नियमों के द्वारा करने का प्रयत्न किया गया है, लेकिन माननीय मंत्री महोदय तो इस सदन के समक्ष इन नियमों को रखना भी नहीं चाहते हैं, ताकि कहीं सदन