स्थानीय बोर्ड अधिनियम-संशोधन विधेयक
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संयोग था कि माननीय सदस्य श्री फड़के का संशोधन विचार-विमर्श के लिए लिया गया और इसलिए माननीय सदस्य श्री चुंद्रीगर अपना संशोधन प्रस्तावित नहीं कर पाए। अगर माननीय सदस्य श्री चुंद्रीगर का संशोधन प्रस्तावित हो जाता, तो माननीय सदस्य श्री फड़के का संशोधन प्रस्तावित नहीं हो पाता और शायद जो मुश्किल अब माननीय सदस्य श्री फड़के के सामने है, वह माननीय सदस्य श्री चुंद्रीगर महसूस कर रहे होते। इसलिए, इस स्पष्टीकरण को देने के बाद मैं विभाजन सूची देखकर बताऊंगा कि माननीय सदस्य श्री फड़के ने मत दिया भी है कि नहीं और दिया है तो मत समर्थन अथवा विरोध में दिया है।
श्री इस्माइल आई. चुंद्रीगर : महोदय! क्या मैं संभावित गलतफहमी को स्पष्ट कर सकता हूं? यह कहना सही नहीं है कि मैंने संशोधन प्रस्तावित नहीं किया था। महोदय! वास्तव में, आपने आदेश दिया था कि मेरे लिए यह प्रस्तुत करना आवश्यक नहीं था, क्योंकि माननीय सदस्य श्री फड़के द्वारा उन्हीं शब्दों में एक संशोधन पहले प्रस्तुत हो गया है।
माननीय अध्यक्ष : मेरा आशय यह कहने का नहीं था कि माननीय सदस्य श्री चुंद्रीगर ने संशोधन प्रस्तुत करने से मना किया था, या वह अपना संशोधन प्रस्तुत करने को उत्सुक नहीं थे। ऐसा नहीं था। वह संशोधन प्रस्तुत करने को उत्सुक थे, लेकिन इस सदन की यह प्रथा है कि जब किसी प्रस्ताव को अनेक सदस्यों द्व ारा प्रस्तावित किया गया हो, तो सुविधा के लिए केवल एक ही सदस्य द्वारा उसे प्रस्तावित किया जाता है। ऐसा नहीं कि श्री चुंद्रीगर संशोधन प्रस्तुत करने के लिए अनिच्छुक थे।
माननीय सदस्य, मैं दोहरा रहा हूं कि संशोधन के प्रस्तावक श्री फड़के ने पृथक मतदान समाप्त करने के उद्देश्य से जब यह पाया कि उनका पहला संशोधन रद्द हो गया है और पृथक मतदान व्यवस्था बरकरार है, तो उन्होंने संशोधन के विरुद्ध मत दिया।
डॉ. भीमराव अम्बेडकर : मैं एक और प्रश्न पूछना चाहता हूं और मामले में आपका आदेश चाहता हूं कि क्या सदन का सदस्य, जिसने संशोधन प्रस्तुत किया हो, वह उसके विरुद्ध मत दे सकता है?
माननीय अध्यक्ष : मेरे ख्याल से उल्लेख से स्पष्ट है कि किसी भी व्यक्ति को अंत तक अपना विचार बदलने का अधिकार है (ठहाका)। . . .
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डॉ. भीमराव अम्बेडकर (बंबई नगर) : मुझे खेद है, लेकिन मैं यह कहे बिना नहीं रह सकता, वह यह कि इस विषय से संबंधित इस दल की इच्छाओं को सरकार को मानना चाहिए था। अगर मेरे मित्र श्री गायकवाड़ द्वारा प्रस्तावित संशोधन स्वीकार