9. स्थानीय बोर्ड अधिनियम-संशोधन विधेयक - Page 151

134 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

कर लिया जाता, तो किसी को नुकसान नहीं पहुंचता, देश के हितों को हानि नहीं पहुंचती। जब स्थिति यह है कि सरकार अपने बहुमत को अत्याचारपूर्ण रूप से इस्तेमाल करना चाहती है, तो मुझे लगता है कि हमें अपना असंतोष सदन छोड़कर और बाकी दिन की कार्यवाही का बहिष्कार कर प्रकट करना चाहिए।

माननीय श्री बी.जी. खेर : मुझे उम्मीद है कि माननीय (डॉ. अम्बेडकर) मुझे कुछ शब्द कहने का मौका देंगे।

यह बहुत दुःखद बात है कि इस देश में जाति व धर्म से संबंधित छोटे से छोटा मुद्दा बहुत संवेदनशील है। जैसा कि स्वतंत्र लेबर पार्टी के माननीय नेता जानते हैं, बहुत समय से हमारी भाषा से ‘अस्पृश्य’ शब्द को निकालने का प्रयास चल रहा है, क्योंकि यह शब्द अत्यधिक दुःखद संबंधों की याद दिलाता है। मैं माननीय सदस्य श्री गायकवाड़ से सहमत हूं कि मात्र नाम बदलने से हम उस उद्देश्य में सफल नहीं हो पाएंगे। इस दिशा में वर्तमान धारा एक प्रयास है, जो अस्पृश्यता को हटाने के लिए है।

हमने एक नया नाम देने की कोशिश की है, हम कहना चाहते थे, ‘परिशिष्ट वर्ग’। लेकिन ‘परिशिष्ट वर्ग’ अंग्रेजी शब्द ‘शिड्यूल्ड कास्ट’ का अनुवाद है और हमने सोचा है कि मराठी भाषा में प्रस्तुत करने के लिए बहुत ही असंगत शब्द है। अगर अंग्रेजी अभिव्यक्ति ‘शिड्यूल्ड कास्ट’ को इस्तेमाल करने के बजाए यदि हम इस अभिव्यक्ति का पर्याय चाहते हैं, तो विकल्प के रूप में हमें ‘परिशिष्ट वर्ग’ को स्वीकार करना पड़ेगा जो इस वर्ग का निर्देश करता है। में उनकी भावनाओं को अच्छी तरह से समझ सकता हूं कि वह बाकी हिन्दुओं से उनको भिन्न मानने के प्रयास को पसंद नहीं करते, किंतु विधान के उद्देश्य के लिए, इस वर्ग की स्थिति को बेहतर बनाने के लक्ष्य को पाने के लिए, हमें उन्हें अन्य हिन्दुओं से अलग दिखाना होगा। हम उन्हें अस्पृश्य या किसी और नाम से पुकार सकते हैं और इतने विशाल हिन्दू समुदाय को भिन्नता दिखाने के लिए जितने कम नामों का इस्तेमाल करें, उतना अच्छा होगा। पर मैं जानता हूं कि पिछले चार-पांच वर्षों से अगर पूरे देश में नहीं तो कम से कम देश के अनेक हिस्सों में ‘हरिजन’ शब्द बहुत प्रचलित हो गया है। यह शब्द ‘शिड्यूल्ड कास्ट’ के पर्याय के रूप में इस्तेमाल करने का प्रयास है, जिसे माननीय सदस्य, स्वतंत्र लेबर पार्टी के नेता का समर्थन मिलना चाहिए था। लेकिन यह बड़ी दुर्भाग्यपूर्ण बात है कि उन्होंने इस प्रश्न को एस दृष्टिकोण से नहीं देखा है। अगर वह किसी और नाम का सुझाव देते हैं जो अनुसूचित वर्ग के लिए उपयुक्त है, तो मैं उम्मीद करता हूं कि उनकी भावनाओं की कद्र करना संभव होता। विकल्प के रूप में मैं उनसे निवेदन करता हूं कि वह इस धारा का आशय यह न लगाएं कि यह किसी भी रूप में दुर्भाग्यवश अछूत कहलाने वाले विस्तृत वर्ग

* बोंबे लेजिस्लेटिव काउंसिल डिबेट्स, खंड 21, पृ. 607-10, 10 अक्तूबर 1927